Monday, July 25, 2011

Delhi Police : लालबत्ती के चक्कर में कटे सांसदजी, विधायकजी के चालान

यातायात पुलिस ने नियमों की अनदेखी करने पर राजधानी के तीन माननीयों के चालान काटे हैं, जिनमें दक्षिणी दिल्ली से सांसद रमेश कुमार, पश्चिमी संसदीय क्षेत्र से सांसद महाबल मिश्रा और हरिनगर क्षेत्र के विधायक हरिशरण सिंह बल्ली शामिल हैं। यातायात पुलिस ने न सिर्फ इनके चालान काटे, बल्कि इनके वाहनों पर लगी लाल बत्ती को भी जब्त कर लिया।

यातायात पुलिस के अनुसार राजधानी में किसी भी सांसद व विधायक को लाल बत्ती लगाकर घूमने की इजाजत नहीं है, लेकिन इन नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले नेताओं की कमी नहीं है। कुछ जागरूक लोगों ने जब इन नेताओं के लाल बत्ती लगे वाहनों के फोटो खींचकर यातायात पुलिस के फेसबुक एकाउंट पर अपलोड किए तो मजबूरन यातायात पुलिस को नियमों की अनदेखी करने के मामले में इनके चालान काटने पड़े। बताते चलें कि इन रसूखदार नेताओं पर हाथ डालना यातायात पुलिस के लिए इतना आसान भी नहीं रहा।


फेसबुक पर मिली शिकायत के बाद लंबे समय तक पुलिस इन माननीयों पर कार्रवाई करने से बचती रही, लेकिन जब मामला आला अफसरों के संज्ञान में आया तो पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। महाबल मिश्रा की ‘प्राडो’ कार पर लाल बत्ती लगे होने की शिकायत मनोरंजन कुमार नामक शख्स ने की थी। सत्येंद्र गर्ग के अनुसार इन वाहनों के चालान काटने के साथ-साथ लाल बत्ती को तुरंत हटाने के निर्देश दिए थे।

Delhi Police : बाबा रामदेव मामले में सुप्रीम कोर्ट की दिल्ली पुलिस को फटकार, दिखाओ रामलीला मैदान का फुटेज

सुप्रीम कोर्ट दिल्ली के रामलीला मैदान में बाबा रामदेव और उनके समर्थकों के ख़िलाफ़ हुई दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का वीडियो फुटेज देखना चाहता है.
जस्टिस बीएस चौहान और स्वतंत्र कुमार की खंडपीठ ने कहा कि वे ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ऐसी घटना दोबारा न हो.
हालाँकि अदालत ने फ़िलहाल गृह मंत्री पी चिदंबरम को इस मामले में पार्टी बनाने से इनकार कर दिया. लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि वो अपना विकल्प खुला रखे हुए है.


चार जून की देर रात को दिल्ली पुलिस ने रामदेव और उनके समर्थकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए उन्हें रामलीला मैदान से हटा दिया था.नोटिस बाद में इस मामले में ख़ुद संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था.
सोमवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने कहा कि पाँच अगस्त को वे रामलीला मैदान में हुई घटना का वीडियो फुटेज देखेंगे.
घटना पर चिंता जताते हुए खंडपीठ ने कहा, "निर्दोष नागरिक इस तरह नहीं पीटे जाने चाहिए. हमें ये सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों."
बाबा रामदेव की ओर से अदालत में जिरह कर रहे वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने अदालत से अनुरोध किया कि वो गृह मंत्री पी चिदंबरम को ये निर्देश दे कि वो इस घटना के बारे में जानकारी दें और उन्हें नोटिस जारी किया जाना चाहिए.
लेकिन अदालत ने फ़िलहाल ऐसा करने से इनकार कर दिया.

MP Police: फेसबुक पर मध्‍य प्रदेश के सीएम का फर्जी प्रोफाइल, इंदौर का लड़का गिरफ्तार

भोपाल। मध्‍य प्रदेश के तमाम आईएएस पीसीएस अधिकारी व पुलिस महकमे के लोग रविवार को अपने मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को फेसबुक पर देख चकित रह गये। हर जगह चर्चा का विषय बन गया, देखते ही देखते प्रोफाइल पर फ्रेंड्स रिक्‍वेस्‍ट की बाढ़ आ गई। तभी अचानक पता चला कि वो प्रोफाइल फर्जी है, जिसे एक नाबालिग छात्र ने बनाया है। साइबर क्राइम की टीम की सहायता से एमपी पुलिस ने सोमवार को उस छात्र को धर दबोचा।


अब अगर इस प्रोफाइल की बात करें तो शिवराज सिंह चौहान के नाम से बने इस प्रोफाइल की वॉल पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कई नेताओं की आपत्तिजनक तस्‍वीरें लगायी गईं। यही नहीं मनमोहन सिंह एवं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भीख मांगते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा एवं फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन को रसोइया और पाकिस्तान के झंडे के बीच तिरंगा की तस्‍वीरें अपलोड की। मुख्यमंत्री के नाम से साइबर क्राइम का यह पहला मामला सामने आया है।

छात्र नाबालिग है, लिहाजा उसके नाम का खुलासा पुलिस ने नहीं किया है। भोपाल के पुलिस महानिरीक्षक शैलेंद्र श्रीवास्‍तव के मुताबिक छात्र की गिरफ्तारी इंदौर में हुई है और उसे सोमवार को ही भोपाल लाया गया है। उससे पूछताछ जारी है।

मुख्यमंत्री की जानकारी में यह मामला लाए जाने के बाद उन्होंने खुद पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर जांच के निर्देश दिए थे।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल बनाने के मामले में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है.

मुख्यमंत्री के नाम से बनी इस प्रोफाइल में कई नेताओं के आपत्तिजनक फोटो चस्पा थे.


इस प्रोफाइल की शिकायत मिलने के बाद भोपाल पुलिस जांच में जुट गई और 15 दिनों की जांच के बाद इंदौर से एक युवक को गिरफ्तार कर लिया. नाबालिग होने के कारण पुलिस ने उसका नाम नहीं खोला है.

मुख्यमंत्री की प्रोफाइल इंदौर के मल्हारगंज के एक सायबर कैफे से जनवरी 2011 में बनाई गई थी. चार जुलाई को यह मामला सार्वजनिक होने के बाद भोपाल पुलिस इसकी तफ्तीश में जुटी हुई थी.

आईजी भोपाल शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि जब पुलिस ने फेसबुक के हैदराबाद स्थित ऑफिस से संपर्क किया तो प्राइवेसी का हवाला देते हुए कंपनी वालों ने जानकारी देने से मना कर दिया.

पुलिस ने इसके बाद इंटरपोल से मदद मांगी और फेसबुक के सिंगापुर स्थित मुख्यालय को संपर्क किया. वहां से जानकारी दी गई कि यह प्रोफाइल मल्हारगंज के सायबर कैफे से बनाई गई है.

इस जानकारी के आधार पर शनिवार रात भोपाल पुलिस इंदौर पहुंची और उन्होंने रविवार देर रात सायबर कैफे पर छापा मारकर कार्रवाई की.

Sunday, July 24, 2011

CG Police : हाईटेक होगी पुलिस भर्ती प्रक्रिया

पुलिस भर्ती में होने वाले घोटालों को रोकने के लिए पुलिस मुख्यालय पूरा सिस्टम बदल रहा है। हर उस रास्ते को बंद करने की कोशिश की गई है, जहां पक्षपात की गुंजाइश होती है। मानवीय हस्तक्षेप को कम से कम रखने के लिए बायोमीट्रिक रिकार्ड से लेकर माइक्रोचिप तक सारे संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा। पुलिस भर्ती के फिजिकल टेस्ट के दौरान पहली बार रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस (आरएफआईडी) का इस्तेमाल होगा।

आमतौर पर ओलिंपिक गेम्स जैसे आयोजन में इसका इस्तेमाल होता है। इसकी शुरुआत अक्टूबर में होने वाली सब इंस्पेक्टर परीक्षा से होगी, जिसमें 400 पद भरे जाने हैं। इसके बाद आरक्षकों के 10 हजार से ज्यादा पदों की भर्ती में भी इसी तरीके का इस्तेमाल होगा।

केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को लिखे पत्र में पुलिस भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने कहा था। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय में प्रशासन विभाग पिछले चार महीने से इसी कवायद में लगा था।

बिहार, उत्तरप्रदेश, राजस्थान समेत दक्षिण भारत के कुछ राज्यों की पुलिस भर्ती प्रक्रिया का बारीकी से अध्ययन करने के बाद उसकी खासियतों को लिया गया। बिहार में पुलिस आरक्षक भर्ती का आवेदन एक पेज की ओएमआर शीट में लिया जाता है। भर्ती प्रक्रिया में मॉडर्न टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है।

इससे भर्ती के दौरान होने वाली मानवीय भूलों को कम किया जा सकेगा। भर्ती स्थलों से सारे रिकार्ड 10-15 मिनट के अंदर ही पीएचक्यू पहुंच जाएंगे। पूरी भर्ती प्रक्रिया और उसमें इस्तेमाल होने वाले तरीकों की जानकारी छत्तीसगढ़ पुलिस की वेबसाइट पर डाल दी गई है। पूरे सिस्टम को खड़ा करने के लिए पीएचक्यू हफ्तेभर के अंदर टेंडर को फाइनल करने जा रहा है।

देश के कई राज्यों ने अपने यहां की भर्ती में इस तरह के तरीकों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। अक्टूबर में पुलिस सब इंस्पेक्टर की भर्ती में इस सिस्टम को टेस्ट किया जाएगा। बड़ी चुनौती आरक्षकों की भर्ती है, जिसमें 10 हजार रिक्त पदों को भरा जाना है।

सारे आवेदन पत्र, प्रवेश पत्र छत्तीसगढ़ पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे। आईजी प्रशासन पवन देव ने बताया कि भर्ती में मॉडर्न टेक्नीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ताकि पारदर्शिता बनी रहे। मानवीय हस्तक्षेप को कम से कम रखने की कोशिश है। ताकि मानवीय भूल से बचा जा सके।

ये बदलाव

> भर्ती के सारे आवेदनों की स्कैनिंग कर उसका डेटाबेस तैयार किया जाएगा। हर आवेदक का परीक्षा के पहले बॉयोमीट्रिक रिकार्ड तैयार किया जाएगा, ताकि कोई मुन्नाभाई उसकी जगह एक्जाम ही न दे पाए।

> प्रवेश पत्र इस तरह से डिजाइन किए जा रहे हैं कि जिलों के भर्ती अधिकारी को भी आवेदन के रोलनंबर तक का पता नहीं होगा। उसे पीएचक्यू एक बारकोड देगा, वही आवेदक की पहचान होगी।

> भर्ती का सारा रिकार्ड ऑनलाइन नेटवर्क से सीधे पुलिस मुख्यालय के सेंट्रल सर्वर में पहुंच जाएगा। इसकी सारी जानकारी रीड ओनली होगी, यानि उसमें कोई भी अधिकारी संशोधन नहीं कर पाएगा। इस सर्वर को चालू करने के लिए फिंगर प्रिंट एक्सेस होगी।

> सबसे ज्यादा गड़बड़ी फिजिकल टेस्ट के दौरान होती है। 1500 मीटर लंबी दौड़ समेत दो टेस्ट में आरएफआईडी टेक्नीक इस्तेमाल होगी। इसमें प्रतियोगी द्वारा दौड़ को पूरा करने में लिए गए समय का सटीक कैलकुलेशन होता है।

> भर्ती प्रक्रिया की पूरी जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। रिजेक्ट आवेदनों की जानकारी भी वेबसाइट पर होगी।

> आवेदकों की मदद के लिए एक हेल्पलाइन शुरू की जाएगी।

Punjab Police : पुलिस अफसरों से प्रमोशन के नाम पर मांगी रिश्वत

पुलिस इंस्पेक्टरों से ही प्रमोशन की फाइल सरकाने के नाम पर रिश्वत मांगी गई। मामला चंडीगढ़ पुलिस के तीन इंस्पेक्टरों की डीएसपी के पद पर प्रमोशन से जुड़ा है। होम सेकेट्ररी इसे दो हजार रुपये का मामला बता रहे हैं जबकि अंदरखाते चर्चा लाखों की हो रही है। अब पुलिस इंस्पेक्टर भी मुकर रहे हैं और होम डिपार्टमेंट के जिस सुपरिटेंडेंट को पैसा देने की बात कही गई थी वह भी इससे इनकार कर रहा है। होम सेकेट्ररी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे विजिलेंस को सौंप दिया है। चंडीगढ़ पुलिस के तीन इंस्पेक्टरों की प्रमोशन डीएसपी के पद पर होनी है। इनमें इंस्पेक्टर केवल कृष्ण, केहर सिंह और एसपीएस सौंधी शामिल हैं।

पुलिस की डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी भी इनके नाम क्लीयर कर चुकी है। हाईकोर्ट भी इनकी प्रमोशन को हरी झंडी दे चुका है। इसके बावजूद इन तीनों की प्रमोशन की फाइल होम सेकेट्ररी के ऑफिस में महीनों से लटकी हुई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सोमवार को इनमें से एक इंस्पेक्टर ज्वाइंट सेक्रेटरी होम अभिषेक देव के पास पहुंच गया तथा अपनी प्रमोशन की फाइल के बारे में पूछा।

ज्वाइंट सेक्रेटरी होम को इंस्पेक्टर ने फाइल चलाने के लिए सचिवालय के एक कर्मचारी को रिश्वत देने की बात कही तो वह दंग रह गए। ज्वाइंट सेक्रेटरी होम ने यह बात होम सेक्रेटरी को बताई तो उन्होंने इंस्पेक्टर केवल कृष्ण और एसपीएस सौंधी को तलब किया। इसके साथ साथ उस कर्मचारी को भी तलब किया गया जिसे रिश्वत देने की बात कही गई थी। होम सेक्रेटरी के सामने तीनों मुकर गए। सूत्रों के अनुसार एक इंस्पेक्टर ने होम सेक्रेटरी को बताया कि उसने दूसरे इंस्पेक्ट के माध्यम से यह रिश्वत दी थी।

एचएस के सामने बयान
दोनों इंस्पेक्टर तथा कर्मचारी के बयान होम सेक्रेटरी राम निवास के समक्ष ही दर्ज किए गए। इंस्पेक्टर रिश्वत देने की बात से मुकर गए तो कर्मचारी ने रिश्वत लेने की बात से इनकार किया।

विजिलेंस करेगी जांच
होम सेक्रेटरी ने विजिलेंस को इस मामले की जांच करने को कहा है। विजिलेंस को यथाशीघ्र इस मामले की रिपोर्ट देने को कहा गया है।

लाखों नहीं हजारों
पुलिस इंस्पेक्टरों से फाइल के नाम पर लाखों नहीं बल्कि दो हजार की रिश्वत मांगने का मामला सामने आया था। मैंने इसकी विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। इंस्पेक्टरों के बयान दर्ज किए गए हैं।
राम निवास, होम सेक्रेटरी

मैंने नहीं की शिकायत
मैं सिर्फ होम सेक्रेटरी आफिस में अपने केस की फाइल के बारे में गया था। रिश्वत देने की कोई शिकायत मैंने नहीं की है।
केवल कृष्ण, इंस्पेक्टर

मुझे नहीं जानकारी
मुझे रिश्वत मांगने के मामले में कुछ नहीं पता। मेरी जानकारी में यह मामला नहीं आया। मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।
एसपीएस सौंधी, इंस्पेक्टर

MP Police: व्यापमं लेगा पुलिस सब-इंस्पेक्टर्स भर्ती परीक्षा

व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) पहली बार पुलिस के सब-इंस्पेक्टर पद के लिए भी भर्ती परीक्षा आयोजित करने जा रहा है। पुलिस विभाग से इसका टेंडर मिलने के बाद व्यापमं ने परीक्षा का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। परीक्षा इसी साल 25 सितंबर को आयोजित होगी।
पुलिस विभाग ने सब-इंस्पेक्टर्स के पदों की भर्ती का जिम्मा इस बार व्यापमं को सौंपा है। इसका मकसद भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। इस प्रक्रिया के जरिए सब-इंस्पेक्टर्स के 515 पद भरे जाएंगे। इसमें पुरुष वर्ग के 371 पद और महिला वर्ग के 144 पद शामिल है। परीक्षा में शामिल होने के 21 जुलाई से 19 अगस्त के बीच ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसमें ओपन श्रेणी के 185 पद, सामान्य महिला वर्ग के 72 पद, अजजा ओपन वर्ग के 75 पद, अजजा महिला वर्ग के 29 पद, अजा ओपन वर्ग के 59 पद, अजा महिला वर्ग के 25 पद, अपिव ओपन के 52 और अपिव के 18 पद शामिल किए गए हैं।

maharastra police: आबा का गुस्सा फूटा, दो पुलिस अधिकारी हुए निलंबित

अहमदनगर के अकोले तहसील में डकैती और दुष्कर्म की सनसनीखेज घटना को गंभीरता लेते हुए राज्य सरकार ने दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।

मंगलवार को गृहमंत्री आरआर पाटील ने इसकी घोषणा की। गृहमंत्री ने पुलिस निरीक्षक प्रकाश पाटील और ड्यूटी अफसर सलीम शेख को काम में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया।

घटना के चलते गृहमंत्री अकोले तहसील के वीरगांव में पीड़ित परिवार से मिलने गए थे। गांव में डकैतों ने एक परिवार की दो लड़कियों के साथ दुष्कर्म किया और चार वृद्ध महिलाओं को निर्वस्त्र करके उनकी पिटाई की थी।


पुलिस घटना के दो घंटे बाद पहुंची थी। पुलिस अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण डकैत वहां से भागने में कामयाब हो गए थे। यह बात सामने आने पर गृहमंत्री ने दो पुलिस अधिकारियों के निलंबन के आदेश दिए हैं।

वहीं मामले की जांच करते हुए पुलिस ने अब तक संतोष पंडित, बाबुशा काले और गोरख भोंसले को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के लिए अदालत ने तीनों लोगों को 11 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है।

पेशे से सर्राफ संतोष, श्रीगोंधा गांव में सोना खरीदने गया था, तभी पुलिस ने उसे और सोना बेचने आए बाकी दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि यह वही सोना है, जो पीड़ित परिवार के घर से चुराया गया था। पीड़ित महिलाओं ने भी गहनों की पहचान की है।

CG Police : पागलों के पीछे पागल हुई छत्तीसगढ़ पुलिस

कांकेर/रायपुर.आमतौर पर गुंडे बदमाशों को ठीक करने वाली पुलिस इन दिनों शहर के पागलों को संवारने में लगी है। पिछले दो दिनों में पुलिस ने शहर की सड़कों में घुमने वाले पांच पागलों को पकड़कर उनका मेडिकल चेकअप कराया बल्कि उन्हें नहला धुलाकर कर हजामत बनवाई तथा नए कपड़े पहनाकर घर तक पहुंचाया।
पुलिस जिन कारणों से भी इन पागलों की सुध ले रही है लेकिन उनके इस कार्य से अपना दिमागी संतुलन खो जाने के बाद दर-दर की ठोकर खाने वाले पागलों की सुध तो ली जा रही है। शहर में घूमने वाले पागलों की खोजबीन पुलिस ने शनिवार को शुरु की। पुराना बसस्टैंड के पास दो पागल एक साथ मिले जबकि दो और नया बस स्टैंड में मिले। एक अन्य पागल पुलिस को शहर के भोईपारा में घुमते हुए मिला।
चार पागल शहर के बाहर तथा एक शहर का ही रहने वाला था जिन्हें पुलिस थाना लेकर आई। पुलिस ने नाई को अस्पताल बुलाया तथा बारी-बारी से उनके बाल दाढ़ी कटवाए फिर उन्हें नहलाकर सभी का स्वास्थ्य परीक्षण कोमलदेव अस्पताल में कराया।


कई दिनों के भूखे-प्यासे पागलों के लिए पुलिस ने भोजन का भी इंतजाम किया। पुलिस की इतनी कवायद से पागलों का हुलिया ही बदल गया। इसके बाद शुरू हुआ पागलों के विदाई का दौर।
शहर से 10 किमी दूर ग्राम सिदेसर के एक पागल को उसके भाई को बुलाकर सौंपा गया। भोईपारा में मिले पागल को भी उसके घर तक छोड़ परिजनों को उसकी देखरेख करने की हिदायत दी। इसी तरह से बाहर के पागलों को वाहन में बैठाकर उनके घरों की ओर रवाना किया गया।

अस्पताल ने फिर दिखाई बेरहमी
हमेशा लोगों से र्दुव्‍यवहार से लेकर कई तरह के कार्यो के लिए बदनाम होने वाली पुलिस ने मानवता दिखाते हुए पागलों की सुध ली।
पागलों का जब स्वास्थ्य परीक्षण कराने अस्पताल भेजा गया तब अस्पताल के कर्मचारियों ने पुलिस का सहयोग नहीं किया और आधा अधूरा परीक्षण किया गया। एक पागल अपने पैर में हुए जख्म पर पट्टी करवाना चाह रहा था लेकिन पट्टी नहीं लगाई गई।

हर दृष्टिकोण से कार्य सराहनीय
दूसरी ओर पुलिस के अचानक पागलों की सुध लेने से कई तरह की चर्चाएं भी हो रही हैं। ऐसा माना जा रहा है की कुछ नक्सली भी शहर में पागल बनकर
जासूसी करते थे। यदि पुलिस इस उद्देश्य से भी पागलों की सुध ले रही है तो भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह प्रयास सराहनीय है।

मानवता के नाते किया कार्य
"पुलिस ने मात्र मानवता के नाते शहर में भटकने वाले पागलों का स्वास्थ्य परीक्षण कराते हजामत कराई एवं नहला धुलाकर उन्हें भोजन कराकर घरों तक पहुंचवाया है। भविष्य में भी पुलिस इस तरह के कार्य करती रहेगी।"
- राजेश जान, टीआई, कांकेर

maharastra police:विदर्भ के 18 पुलिस अफसरों का तबादला

राज्य सरकार ने पुलिस उपाधीक्षक और सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के 51 पुलिस अधिकारियों का तबादला किया है। इनमें विदर्भ के 18 पुलिस अधिकारी शामिल हैं। नागपुर के सहायक पुलिस आयुक्त सूर्यभान इंगले का तबादला नागपुर ग्रामीण (सावनेर उपविभाग) में उपविभागीय पुलिस अधिकारी के रूप में किया गया है।

नागपुर समाज कल्याण विभाग में कार्यरत पुलिस उपाधीक्षक भगवान पाटील को खेड (जिला रत्नागिरी) का उपविभागीय पुलिस अधिकारी बनाया गया है, वहीं आर्वी के उपविभागीय पुलिस अधिकारी सुभाष पानसे नागपुर यूओटीसी के पुलिस उपाधीक्षक बनाए गए हैं।

नागपुर के पुलिस उपाधीक्षक हनुमंत गिरी का तबादला नाशिक की पुलिस अकादमी में सहायक निदेशक के तौर पर किया गया है। अचलपुर के उपविभागीय पुलिस अधिकारी पांडुरंग माहुरे को अमरावती में नागरिक अधिकार संरक्षण विभाग का पुलिस उपाधीक्षक बनाया गया है।

वामन खरात अब अमरावती के समाज कल्याण विभाग के नए पुलिस उपाधीक्षक होंगे। वे बीड़ स्थित आष्टी में उपविभागीय पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अकोट के उपविभागीय पुलिस अधिकारी शेख सुलतान शेख फकीरा का औरंगाबाद में तबादला हो गया है। उन्हें नागरिक अधिकार संरक्षण विभाग में पुलिस उपाधीक्षक बनाया गया है।

अंजनगांव के उपविभागीय पुलिस अधिकारी श्रीराम तोडासे अब चंद्रपुर मुख्यालय में पुलिस उपाधीक्षक का कामकाज संभालेंगे। भोकरधन के पुलिस अधिकारी सुनील मालुसरे को पदोन्नति मिली है। उन्हें भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है।

अमरावती की अपराध शाखा में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक किरण धोटे का तबादला कारंजा (जिला वाशिम) में उपविभागीय पुलिस अधिकारी के रूप में किया गया है। वहीं वाशिम के उपविभागीय पुलिस अधिकारी जगदेव आखरे कामठी में उपविभागीय पुलिस अधिकारी बनाए गए हैं।

वरोरा के उपविभागीय पुलिस अधिकारी अशोक भरते का तबादला कोल्हापुर में हो गया है। वे गडहिंग्लज में उपविभागीय पुलिस अधिकारी के तौर पर काम करेंगे। अमरावती के उपविभागीय पुलिस अधिकारी सुनील लोखंडे वणी में उसी पद पर भेजे गए हैं।

देउलगांव राजा के उपविभागीय पुलिस अधिकारी मोहन क्षीरसागर अमरावती में सहायक पुलिस आयुक्त बनाए गए हैं। साकोली के उपविभागीय पुलिस अधिकारी दत्तात्रय जाधव को मुंबई भेजा गया है। उन्हें सहायक पुलिस आयुक्त पद का जिम्मा सौंपा गया है।

अमरावती के सहायक पुलिस आयुक्त दिनकर महाजन अचलपुर में उपविभागीय पुलिस अधिकारी बनाए गए हैं। तुमसर उपविभाग के उपविभागीय पुलिस अधिकारी बी.डी.पौनीकर को नागपुर परिक्षेत्र के विशेष पुलिस महानिरीक्षक का वाचक पुलिस उपाधीक्षक नियुक्ति किया गया है।

श्री पौनीकर की जगह पवनी उपविभाग के उपविभागीय पुलिस अधिकारी प्रशांत खैरे लाए गए हैं।

Foreign Police : China Police: चीन को बताएंगे बिहार पुलिस की बर्बरता

बिहार पुलिस की बर्बरता का एक वीडियो इन दिनों इंटरनेट जगत पर सनसनी बना हुआ है। यह वीडियो ३ जून को बिहार के अररिया जिले के फोरबेसगंज में हुई पुलिस फायरिंग का है।
इस फायरिंग में फोरबेसगंज के ब्लॉक रामपुर और भजनपुर गांवों के ५ लोग मारे गए थे। यह लोग एक कारखाने के निर्माण के लिए दो गांवों से जोड़ने वाली सड़क की नाकेबंदी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. पुलिस ने न केवल प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई बल्कि उन्हें उनके घरों तक पीछा करके उन्हें मार डाला पॉइंट ब्लैंक रेंज में जिन छह लोगों को गोली से मार डाला गया उनमें दो महिलाए और एक बच्चा भी शामिल है।
यह वीडियो दिखाता है कि पुलिस किस तरह लोगों पर अत्याचार करते हुए संवेदनहीन हो जाती है। वीडियो में एक युवक घायल पड़ा हुआ दिख रहा है और एक पुलिस वाले उसे अपने जूतों से कुचल रहा है। बाद में यह युवक दम तोड़ देता है। इस वीडियो में पुलिस गोलीबारी में मारे गए गांव के अन्य लोग भी दिखाई दे रहे हैं।
बिहार पुलिस की बर्बरता के खिलाफ दिल्ली में मानवाधिकार संगठन एकजुट हो रहे हैं और इस मुद्दे पर बिहार सरकार से सफाई मांगी जा रही है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता और कमिटी फॉर दी जस्टिस टू विक्टीम्स ऑफ़ फोरबिसगंज फायरिंग के सदस्य महताब आलम ने कहा कि हम बिहार सरकार से तीन स्पष्ट मांग करते है। सबसे पहले पूरे घटनाक्रम की उच्च न्यायालय के एक वर्तमान न्यायाधीश से एक समय बद्ध न्यायिक जांच कराई जाए। दूसरे, इस घटना में शामिल सभी पुलिसकर्मियों पर तत्काल भारतीय दंड संहिता की 307 धारा के तहत मामला और उनके खिलाफ एफआईआर के पंजीकरण में शामिल कर्मियों के तत्काल निलंबन और तीसरे, प्रस्तावित सांप्रदायिक हिंसा और लक्षित विधेयक के अनुसार मुआवजे के रूप में प्रत्येक परिवार के लिए कम से कम 10 लाख रुपये और आश्रितों में से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाये।
इन मांगों को 13 जून से पहले नहीं माना गया तो बिहार में अल्पसंख्यकों की हत्याओं को उजागर करते हुए चीनी दूतावास को भी एक ज्ञापन प्रस्तुत किया जाएगा। गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार १३ जून से सद्भावना मिशन पर चीन की यात्रा पर हैं।
इस बीच समिति का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) से मिलकर भी फायरिंग में मारे गए लोगों की घटना की जांच की मांग करेगा।

Foreign Police : Maxico Police: मैक्सिको पुलिस को चाहिए 'खूबसूरत महिलाएं'

मैक्सिको में ‘सुंदर’ महिला पुलिस की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है, जिसे लेकर महिला संगठनों में रोष है। पर्यटन पुलिस बल के लिए इस विज्ञापन में आवेदकों से जो खूबियां चाही गई हैं, उनमें 18 से 26 वर्ष के बीच उम्र, कम से कम 5 फुट 5 इंच कद और उसी के अनुपात में वजन तथा अच्छी शारीरिक और मानसिक सेहत प्रमुख हैं।


इस बल में सिर्फ महिलाएं होंगी और सामान्य पुलिस से अलग नजर आने के लिए आकर्षक यूनिफार्म पहनेंगी। इस ‘खूबसूरत’ टूरिस्ट पुलिस के पास कोई हथियार नहीं होगा और आमतौर पर उसका काम पर्यटकों का मार्गदर्शन करना होगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे पर्यटन में वृद्धि होगी।

UP Police : माया की माया, तबादलों की बौछार 78 पुलिस अधिकारियों का ट्रांसफर

उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार ने पुलिस अधिकारियों के ताबड़तोड़ तबादले किये है। शनिवार को सरकार ने चार अपर पुलिस महानिदेशक, दो एसपी, 33 एएसपी व 39 डिप्टी एसपी के तबादले किये है। अपर पुलिस महानिदेशक गुरबचन लाल अपर पुलिस महानिदेशक, एनसीआर जोन, मेरठ से अपर पुलिस महानिदेशक दूर संचार उप्र लखनऊ, के0एल0 मीना, अपर पुलिस महानिदेशक, सुरक्षा उ0प्र0 लखनऊ से अपर पुलिस महानिदेशक एनसीआर जोन मेरठ किया गया है।

पुलिस अधीक्षकों में एस0एन0 सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, गौतमबुद्धनगर से पुलिस अधीक्षक प्रशिक्षण, उ0प्र0 प्रशिक्षण निदेशालय, लखनऊ ज्योति नारायन पुलिस अधीक्षक प्रशिक्षण, उ0प्र0 प्रशिक्षण निदेशालय लखनऊ से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौतमबुद्धनगर किया गया है। इन तबदालों को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़ कर देखा जा रहा है। जिसका संकेत मु यमंत्री मायावती ने सरकार के चार साल पूरे होने पर शुक्रवार को घोषणा की थी।

अपर पुलिस अधीक्षकों में अजय कुमार सिंह, उपसेनायक, 20 वीं वाहिनी पीएसी आजमगढ़ से उपसेनायक 42वीं वाहिनी पीएसी, इलाहाबाद, कैलाश सिंह, उपसेनानायक, 42वीं वाहिनी पीएसी इलाहाबाद से उपसेनानायक 20वीं वाहिनी पीएसी, आजमगढ़ , राम प्रताप सिंह, उपसेनानायक, 26वीं वाहिनी पीएसी गोरखपुर से अपर पुलिस अधीक्षक, यातायात, आगरा , उमेश कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक, एटीएस लखनऊ से अपर पुलिस अधीक्षक, एंटी नक्सल चंदौली, अजय वर्मा, अपर पुलिस अधीक्षक, सीबीसीआईडी मु यालय लखनऊ से अपर पुलिस अधीक्षक फूड सेल लखनऊ , श्रीकृष्ण अपर पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण आगरा से अपर पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण लखनऊ , ददन पाल, अपर पुलिस अधीक्षक फिरोजाबाद से अपर पुलिस अधीक्षक, काशीरामनगर, राजेश कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक, मैनपुरी से अपर पुलिस अधीक्षक चंदौली, राधेश्याम,
अपर पुलिस अधीक्षक काशीरामनगर से अपर पुलिस अधीक्षक फिरोजाबाद, दिवाकर कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक, मऊ से अपर पुलिस अधीक्षक, जौनपुर, अशोक कुमार पाण्डेय, अपर पुलिस अधीक्षक हमीरपुर से अपर पुलिस अधीक्षक महराजगंज , विक्रमादित्य सचान, अपर पुलिस अधीक्षक महोबा से अपर पुलिस अधीक्षक देवरिया, राजेश कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक बलरामपुर से अपर पुलिस अधीक्षक, ज्योतिबाफूलेनगर, सुनील कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक सुरक्षा फैजाबाद से अपर पुलिस अधीक्षक नगर, अलीगढ़ , जवाहर, अपर पुलिस अधीक्षक, देवरिया से अपर पुलिस अधीक्षक मैनपुरी, शिव प्रसाद उपाध्याय, अपर पुलिस अधीक्षक महराजगंज से अपर पुलिस अधीक्षक हमीरपुर, मनोज कुमार सोनकर, अपर पुलिस अधीक्षक इटावा से अपर पुलिस अधीक्षक मऊ, अशोक प्रसाद, अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, लखनऊ से अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण पूर्वी आगरा, ओम प्रकाश सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक हरदोई से अपर पुलिस अधीक्षक सुरक्षा, आगरा, डा0 अरविन्द, अपर पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण मुरादाबाद से अपर पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण पश्चिमी आगरा, अनिल कुमार सिंह, अपर पुलिस ज्योतिबाफूलेनगर से अपर पुलिस अधीक्षक हरदोई, बाबू राम,

अपर पुलिस अधीक्षक बुलन्दशहर से अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, मुरादाबाद, महेन्द्र पाल सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक बागपत से अपर पुलिस अधीक्षक, बुलन्दशहर, राहुल राज, अपर पुलिस अधीक्षक जौनपुर से अपर पुलिस अधीक्षक, बलरामपुर , संतोष कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक चंदौली से अपर पुलिस अधीक्षक इटावा, देवेन्द्र प्रताप नरायन पाण्डेय अपर पुलिस अधीक्षक, यातायात वाराणसी से अपर पुलिस अधीक्षक, महोबा, राहुल यादुवेन्द्र, अपर पुलिस अधीक्षक नगर मुरादाबाद से अपर पुलिस अधीक्षक बिजनौर, मान सिंह चौहान, अपर पुलिस अधीक्षक, नगर अलीगढ़ से अपर पुलिस अधीक्षक नगर वाराणसी, दिनेश चन्द्र, अपर पुलिस अधीक्षक जौनपुर से अपर पुलिस अधीक्षक बागपत ,

विजय भूषण अपर पुलिस अधीक्षक नगर वाराणसी से अपर पुलिस अधीक्षक नगर मुरादाबाद, जगदीश शर्मा, उपसेनानायक 38वीं वाहिनी पीएसी अलीगढ़ से अपर पुलिस अधीक्षक जौनपुर, ललित कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक नगर पश्चिमी लखनऊ से अपर पुलिस अधीक्षक क्षेत्रीय अभिसूचना, लखनऊ, राकेश सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक क्षेत्रीय अभिसूचना कानपुर से अपर पुलिस अधीक्षक नगर पश्चिमी लखनऊ

पुलिस उपाधीक्षक, विजय नरायन सिंह, पुलिस उपाधीक्षक ई0ओ0डब्लू0 कानपुर से पुलिस उपाधीक्षक, झॉसी , राजा राम वर्मा, पुलिस उपाधीक्षक उन्नाव से पुलिस उपाधीक्षक फतेहगढ़, श्रीमती गुनजीत श्रीवास, पुलिस उपाधीक्षक, अभिसूचना मु यालय, लखनऊ से पुलिस उपाधीक्षक उ0प्र0 पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लखनऊ, मचुवा राम दुखटल पुलिस उपाधीक्षक, फतेहगढ़ से पुलिस उपाधीक्षक उन्नाव, श्रीमती सुमन चौधरी पुलिस उपाधीक्षक उ0प्र0 पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड लखनऊ से पुलिस उपाधीक्षक अभिसूचना मु यालय लखनऊ, मोह मद नाजिम हसन, सहायक सेनानायक 32 वीं वाहिनी पीएसी, लखनऊ से सहायक सेनानायक 28वीं वाहिनी पीएसी इटावा, विनोद कुमार पुलिस उपाधीक्षक आगरा से पुलिस उपाधीक्षक अ बेडकरनगर,

महेन्द्र कुमार, पुलिस उपाधीक्षक आगरा से पुलिस उपाधीक्षक मेरठ, जय नरायन सिंह पुलिस उपाधीक्षक आगरा से पुलिस उपाधीक्षक कानपुर नगर, ब्रजेश कुमार गौतम, पुलिस उपाधीक्षक, आगरा से पुलिस उपाधीक्षक, अलीगढ़ , संजय कुमार पुलिस उपाधीक्षक मथुरा से पुलिस उपाधीक्षक, लखनऊ, आशुतोष द्विवेदी, पुलिस उपाधीक्षक, मथुरा से पुलिस उपाधीक्षक, आगरा, वीरेन्द्र सिंह, पुलिस उपाधीक्षक अलीगढ़ से पुलिस उपाधीक्षक आगरा, बलरामाचारी दुबे, पुलिस उपाधीक्षक, एटा से पुलिस उपाधीक्षक कानपुर नगर, असित श्रीवास्तव, पुलिस उपाधीक्षक एटा से पुलिस उपाधीक्षक इलाहाबाद, बलीराम सरोज पुलिस उपाधीक्षक लखनऊ से पुलिस उपाधीक्षक इलाहाबाद, बी0डी0 मौर्या, पुलिस उपाधीक्षक, श्रावस्ती से पुलिस उपाधीक्षक, कौशाम्बी, ब्रज मोहन सिंह पुलिस उपाधीक्षक कौशाम्बी से सहायक सेनानायक 32वीं वाहिनी पीएसी, लखनऊ,

जीतेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, पुलिस उपाधीक्षक, काशीरामनगर से पुलिस उपाधीक्षक आजमगढ़, राजेश कुमार पुलिस उपाधीक्षक इलाहाबाद से पुलिस उपाधीक्षक फैजाबाद, आशुतोष मिश्रा, पुलिस उपाधीक्षक इलाहाबाद से पुलिस उपाधीक्षक मथुरा, घनश्याम, पुलिस उपाधीक्षक इलाहाबाद से पुलिस उपाधीक्षक सहारनपुर, दिनेश कुमार द्विवेदी पुलिस उपाधीक्षक इलाहाबाद से पुलिस उपाधीक्षक बहराइच, शैलेन्द्र कुमार राय, पुलिस उपाधीक्षक आजमगढ़ से पुलिस उपाधीक्षक जौनपुर, राजेश कुमार श्रीवास्तव पुलिस उपाधीक्षक आजमगढ़ से पुलिस उपाधीक्षक काशीरामनगर, सिद्धार्थ पुलिस उपाधीक्षक बलिया से पुलिस उपाधीक्षक आगरा, अयोध्या प्रसाद सिंह, पुलिस उपाधीक्षक बलिया से पुलिस उपाधीक्षक मुज फरनगर, राम प्रकाश पुलिस उपाधीक्षक बलिया से पुलिस उपाधीक्षक एटा,

प्रकाश स्वरूप पाण्डेय पुलिस उपाधीक्षक बरेली से पुलिस उपाधीक्षक सिद्धार्थनगर, विजय कुमार शर्मा पुलिस उपाधीक्षक सिद्धार्थनगर से पुलिस उपाधीक्षक बरेली, ज्ञानेन्द्र नाथ प्रसाद पुलिस उपाधीक्षक बांदा से पुलिस उपाधीक्षक मथुरा, गजेन्द्र सिंह, पुलिस उपाधीक्षक बांदा से पुलिस उपाधीक्षक देवरिया , अजय कुमार सिंह पुलिस उपाधीक्षक अ बेडकरनगर से पुलिस उपाधीक्षक आगरा, देवेश कुमार शर्मा पुलिस उपाधीक्षक देवरिया से पुलिस उपाधीक्षक आजमगढ़, देवेन्द्र सिंह पुलिस उपाधीक्षक देवरिया से पुलिस उपाधीक्षक बांदा।

अरविन्द मिश्रा पुलिस उपाधीक्षक कानपुर नगर से पुलिस उपाधीक्षक एटा, सुशील कुमार शुक्ला पुलिस उपाधीक्षक मुज फरनगर से सहायक सेनानायक 48वीं वाहिनी पीएसी सोनभद्र, आशुतोष शुक्ला पुलिस उपाधीक्षक चंदौली से पुलिस उपाधीक्षक बांदा, मारतण्ड प्रकाश सिंह पुलिस उपाधीक्षक सीतापुर से पुलिस उपाधीक्षक झॉसी पूर्व हुआ स्थानान्तरण परिवर्तित होकर अब सहायक सेनानायक 35वीं वाहिनी पीएसी लखनऊ किया गया है।

MP Police: क्रिटिकल केस भी आसानी से सुलझा रहा है सायबर सेल

जिन आपराधिक मामलों को निपटाने में जिला पुलिस को लंबा समय लग जाता था, अब सायबर पुलिस उन्हें चंद दिनों में ही सुलझा रही है। राजधानी स्थित पुलिस दूरसंचार मुख्यालय में गठित राज्य सायबर पुलिस ने चंद महीनों में ऐसे ही कुछ केस बड़ी आसानी से हल कर दिए। इससे न सिर्फ पीड़ित को राहत मिली है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली में भी सुधार आया है।

ये है सायबर सेल टीम

डीएसपी- दीपक ठाकुर, सुनील राजोरे, देवंेद्र चौबे ठ्ठ इंस्पेक्टर- प्रवीण छारिया, प्रशांत द्विवेदी ठ्ठ सब इंस्पेक्टर- आर.के. शर्मा, शेफाली टाकेलकर ठ्ठ एएसआई- किरण सुमेर ठ्ठ हेड कांस्टेबल- सुशील बारई, भगवानसिंह, मुकेश मिश्रा, करण पांडे ठ्ठ कांस्टेबल- इंद्रपालसिंह, रितेशसिंह, जितेंद्रसिंह, कैलाश चौरसिया, मुनंेद्र मिश्रा, रानू डेकले, सौरभ भट्ट, अंकुर वर्मा, परसराम सोलंकी।

24 घंटे में सुलझाया मामला
2010 में भोपाल-इटारसी के बीच ट्रेन में अज्ञात बदमाशों ने एक परिवार से ६ लाख रु. के जेवरात लूट लिए थे। इटारसी में पीड़ित ने टीटीई को सारी बात बताई। रिपोर्ट मनमाड़ (महाराष्ट्र) जीआरपी ने दर्ज की। सायबर पुलिस को पुणो से फैक्स से पूरी जानकारी भेजी। सायबर पुलिस ने ट्रैकर के जरिए पीड़ितों के बैग में रखे मोबाइल की लोकेशन ढूंढ़ी।24 घंटे में अपराधियों को धर दबोचा।

7 दिन में पकड़ी प्रोग्राम चोरी
2010 में ही इंदौर की कंपनी ने जो प्रोग्राम बनाया, उसे मैनेजर नौकरी छोड़ते वक्त साथ ले गया। नई कंपनी खोलकर उसी प्रोग्राम को अपने नाम पर पेटेंट करा लिया। १क् करोड़ के डिजाइन को २ करोड़ में बेच दिया। सायबर पुलिस ने दोनों कंपनियों के कम्प्यूटर और साइट के डिजिटल फोटोग्राफ एवं समस्त पुराने मेल डिटेल का विश्लेषण किया। सायबर की जांच के आधार पर मामला सुलझा।

हमारी टीम पूरी मेहनत से काम कर रही है। जल्द ही यह पुलिस महकमे की सबसे सशक्त टीम के रूप में उभरेगी। जनता को जागरूक होना होगा। वे हमसे सीधे संपर्क कर सकते हैं।
राजेंद्र मिश्रा, आईजी, सायबर सेल

maharastra police:नागपुर शहर पुलिस को पहली बार सबसे महंगा बुलेटप्रूफ फायरिंग (आरमोड प्रूफ कैरियर) पुलिस वाहन

मुंबई समेत अन्य दूसरे शहरों की तरह अब नागपुर पुलिस भी आधुनिक हथियारों से सुसज्ज हो चली है। शहर पुलिस के पास आधुनिक हथियार आ चुके हैं।

इन हथियारों को चलाने के लिए जवानों को बकायदा प्रशिक्षित किया जा रहा है। इससे उपराजधानी की पुलिस अब और ताकतवर बन गई है, क्योंकि नागपुर शहर पुलिस को पहली बार सबसे महंगा बुलेटप्रूफ फायरिंग (आरमोड प्रूफ कैरियर) पुलिस वाहन मुहैया कराया गया है।

यह कीचड़, रेत और उबड़- खाबड़ वाले रास्तों पर सरपट दौड़ सकता है। इसमें फोरविल ड्राइव सिस्टम है, इसके चारों पहिए एक साथ घूमते हैं। इसका इंजन 5883 सीसी का है।

इसके अलावा और कई खूबियों वाले इस वाहन के मिलने से पुलिस अब दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में पीछे नहीं रहेगी।

दुश्मन की हर हरकत पर होगी नजर:

अभी तक देखा गया है कि मकानों, अस्पतालों या स्कूलों में छुपने वाले दुश्मनों से निपटने के लिए पुलिस को काफी जद्दोजहद करनी पड़ती थी।

इसमें अत्याधुनिक हथियारों से लैस पुलिस जवान, दुश्मन की हर हरकतों को आसानी से देख सकते हैं कि दुश्मन कहां छुपा है और वह किस तरह की पोजीशन ले रहा है।

दुश्मनों को यह पता नहीं चल सकेगा कि वाहन के अंदर क्या हरकत हो रही है, लेकिन दुश्मन की हरकत का पता पुलिस को लग जाएगी। अभी तक पुलिस बड़ी मुश्किल से खुद की जान को जोखिम में डाल कर उनका मुकाबला करती थी।

इससे पहले पुलिस, दुश्मनों से फेस टू फेस मुकाबला करने में सक्षम नहीं थी। इस वाहन के आने से किसी भी खतरनाक परिस्थिति का मुंहतोड़ जबाब नागपुर पुलिस दे सकती है।

पुलिस, गोलियां बरसाने वाले दुश्मन के सामने इस वाहन में जाकर उसका मुकाबला करते हुए उसे चित कर सकती है। यह कहना गलत नहीं होगा कि शहर पुलिस अब पूरी तरह से हर मामले में ताकतवर बन गई है।

टायर पंचर होने पर भी दौड़ेगा 70 किमी तक

बुलेट प्रूफ फायरिंग पुलिस वाहन को बनाने में करीब 50 लाख की लागत लगी है। इस वाहन का वजन करीब साढ़े 7 टन है। इसके टायरों पर गोली लगने का खास असर नहीं होगा, फिर भी टायर पंचर हो जाने पर लगभग 70 किमी तक बिना किसी रुकावट के चलेगा।

खास बात यह है कि यह उसी गति से चलेगा, जिस गति से पंचर होने से पहले चल रहा था।

इसका ईंधन टैंक 200 लीटर का है, इसमें यूं तो 14 लोगों के बैठने की क्षमता है, लेकिन किसी घटना के दौरान दुश्मनों से निपटने के लिए 10 लोग आसानी से बैठ कर दुश्मनों का मुकाबला कर सकते हैं। इसके भीतर एक साथ 8 जवान किसी भी दुश्मन पर फायरिंग कर सकते हैं।

महाराष्ट्र में हैं 4 वाहन

नागपुर एम टी सेक्शन के इंस्पेक्टर अनिल देशमुख ने बताया कि महाराष्ट्र में इस तरह के वाहन चार शहरों को उपलब्ध कराए गए हैं, जिसमें नागपुर, सोलापुर, औरंगाबाद और अमरावती शहर पुलिस का समावेश है।

यह वाहन उन्हीं शहरों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जहां पर पुलिस आयुक्तालय हैं। इस तरह के वाहन पुणे, ठाणे, नासिक आदि शहरों के लिए प्रस्तावित है। यह वाहन क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) के पास रहेगा। नागपुर में इसके लिए क्यूआरटी के एक जवान को विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया गया है।

इसलिए बनाया गया है वातानुकूलित

इस वाहन में कहीं से भी हवा का संचार नहीं हो सकता है। इसके भीतर बैठने वाले पुलिस जवान को घुटन न हो या किसी अन्य प्रकार की परेशानी न हो और उसे सही वातावरण मिल सके इसलिए इस वाहन को पूरी तरह से वातानुकूलित बनाया गया है।

नागपुर पुलिस हो गई हाईटेक

नागपुर पुलिस को इस तरह का वाहन मिलने के बाद जवानों का हौसला बढ़ने के साथ ही शहर पुलिस अब और हाईटेक हो गई है। राज्य के दूसरे शहरों की तरह इस शहर में अब पुलिस दुश्मनों की आंखों में आंखें डाल कर उसका मुकाबला आमने-सामने से कर सकती है।
इंस्पेक्टर अनिल देशमुख, नागपुर एमटी विभाग

UP Police : पुलिस भर्ती आवेदन फॉर्म के वितरण में बदइंतजामी से नाराज हजारों युवकों का हंगामा

जिले में शुक्रवार को पुलिस भर्ती आवेदन फॉर्म के वितरण में कथित बदइंतजामी से नाराज हजारों युवकों ने हंगामा किया और पुलिस के साथ उनकी झड़पें हुईं। उग्र युवाओं को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।

सदर इलाके स्थित मुख्य डाकघर में पुलिस कांस्टेबल के आदेवन फॉर्म लेने आए करीब पांच हजार युवकों ने आवेदन फॉर्म मिलने में देरी से नाराज होकर हंगामा करना शुरू कर दिया। इस दौरान वहां मौजूद पुलिस बल ने जब उन्हें रोका तो वे पुलिस से भिड़ गए।

आक्रोशित छात्रों पर लाठियां भांजकर पुलिस ने उन्हें तितर-बितर किया। युवकों का आरोप है कि बदइंतजामी के कारण फॉर्म मिलने में घंटों देरी लग रही थी। अगर व्यवस्थित तरीके से वितरण होता तो सबको समय पर फॉर्म मिल जाते। आवाज उठाने पर पुलिस उन्हें बाहर निकालने लगी जिसके बाद युवा उग्र हो गए।

सदर थाना प्रभारी पंकज राय ने बताया, "फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। तनाव के मद्देनजर पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।" उन्होंने कहा कि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

UP Police : 'दारोगा बाबू' की दौड़ में अचेत हुए 32 सिपाही, महकमा हुआ शर्मसार

प्रदेश पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड द्वारा उपनिरीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए की जा रही दौड के दौरान आज यहां पुलिस लाइन मैदान में 32 सिपाही बेहोश हो गये जिसमें दो की हालत गंभीर है।

बेहोश सभी सिपाहियों को जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया है। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि सिपाही से दारोगा पद पर प्रोन्नति के लिये 75 मिनट में पुलिस लाइन के 25 चक्कर लगाने थे। दौड के दौरान ही 32 सिपाही बेहोश होकर गिर पडे। दौड में दो सौ से अधिक सिपाहियों ने हिस्सा लिया था। प्रोन्नति की दौड में आस पास के जिलों से भी सिपाही आये थे।


प्रोन्नति के लिये कल हुई दौड में एक पुलिसकर्मी की मृत्यु हो गयी थी तथा 24 बीमार हो गये थे।

राज्य के पुलिस महानिरीक्षक .कानून व्यवस्था. ए.पी.माहेश्वरी के अनुसार राज्य के 18 जिलों में पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा सिपाहियों को प्रोन्नत करने के लिए लिखित परीक्षा के बाद 75 मिनट में दस किलोमीटर की दौड करायी जा रही थी।

कानपुर में दौड़ के दौरान 14 पुलिसकर्मी बीमार हो गये जिसमें एक को सघन चिकित्सा कक्ष में भर्ती कराया गया। सात पुलिसकर्मियों को उपचार के बाद घर भेज दिया गया जबकि अन्य का अस्पताल में उपचार चल रहा है। इसके अलावा मेरठ में सात पुलिसकर्मी बीमार हो गये जिसमें 44वीं वाहिनी पीएसी मेरठ में तैनात आरक्षी अगरज कुमार दुबे .37. की मृत्यु हो गयी।

सीतापुर में चार पुलिसकर्मी बीमार हुये। उनका उपचार चल रहा है और सभी खतरे से बाहर हैं।

इससे पूर्व भी राज्य में रैंकर पदोन्नति के दौरान तीन पुलिसकर्मियों की मौत हो गयी थी और राज्य सरकार ने इस तरह की दौड पर रोक लगा दी थी।

Delhi Police : ट्रेनी दरोगा ने एसआई को मार डाला

निहाल विहार थाने में तैनात एक सीनियर सब इंस्पेक्टर (एसआई) की उसी थाने के ट्रेनी एसआई ने गोली मारकर हत्या कर दी। ट्रेनी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि दोनों के बीच किसी बात को लेकर अनबन थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

पश्चिमी जिले के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त वी रंगनाथन ने बताया कि 1996 बैच के एसआई कैलाश चंद (40) को स्पेशल सेल से महज तीन माह पहले ही निहाल विहार थाने भेजा गया था। वहीं, अमरजीत 2009 में पुलिस में भर्ती हुआ था और दो माह पहले ट्रेनी एसआई के तौर पर उसे रणहौला थाने से स्थानांतरित किया गया था।

गुरुवार शाम कैलाश जांच अधिकारी के कमरे में बैठे हुए थे, तभी करीब 5:15 बजे अमरजीत गश्त से लौटा और सर्विस रिवाल्वर से उन पर दो फायर किए। गोली पेट और सीने में लगी। घायल कैलाश को बालाजी एक्शन अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। कैलाश पांच वर्ष तक दिल्ली पुलिस की सबसे अहम यूनिट स्पेशल सेल में तैनात रहे। सरोजनी नगर ब्लास्ट सहित कई वारदात में उन्होंने छानबीन की थी। मूल रूप से झांसी के कैलाश दिलशाद गार्डन में अपने परिवार के साथ रहते थे। परिवार में पत्नी, दो बच्चों व माता-पिता हैं।

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Rajasthan Police :जमकर होती है पुलिस लाइन स्कूल में शराब पार्टी

ठीक सामने शहर पुलिस अधीक्षक (एसपी) का बंगला और स्कूल की दीवार से ही सटी पुलिस लाइन। यहां एक ही परिसर में राजकीय माध्यमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के दो स्कूल चलते हैं और पूरा शहर उनको पुलिस लाइन स्कूल के नाम से ही जानता है। बावजूद इसके दोनों स्कूलों के बच्चों की नियति है कि प्रतिदिन सुबह पढ़ाई शुरू करने से पहले उन्हें कक्षाओं और खेल मैदान में बिखरी शराब के खाली बोतलें और पाउच बीनने पड़ते हैं। वे इन्हें उठाकर एक जगह इकट्ठा करते हैं और फिर हाथ धोकर पढ़ाई शुरू करते हैं। पुलिस को कई बार स्कूल प्रशासन ने शिकायतें दी लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस लाइन के इन दोनों स्कूलों में प्रतिदिन सुबह छात्र शराब की बोतलें बीनकर कौनसा सबक सीख रहे हैं, यह तो वे खुद भी नहीं जानते लेकिन स्कूल के शिक्षक इससे जरूर परेशान हैं। वे नहीं चाहते कि बच्चों का इस बुरी चीज से किसी तरह वास्ता पड़े लेकिन, कक्षाओं तक में सुबह जगह-जगह सिगरेट के पैकेट, पानी और शराब की खाली बोतलें मिलती हैं। कई बार तो सुबह बच्चों का वास्ता फर्श पर बिखरी शराब और फूटी बोतलें और उसकी गंध से पड़ता है। शिक्षकों ने बताया कि दोनों स्कूल एक पारी में चलते हैं। कई बार तो स्कूल समय में लोग यहां मौका तलाशते रहते हैं। स्कूल बंद होते ही उनको मौका मिल जाता है। डेढ़ साल पहले भी पुलिस ने यहां से कुछ पुलिसकर्मियों को शराब पीते हुए पकड़ा था। उसके बाद एक गार्ड लगाया था। तब से कुछ कमी आई थी, लेकिन 6 माह से गार्ड भी हटा लिया गया है। फिर से वही आलम हो गया है।


क्यों है मुसीबत

स्कूल पुलिस लाइन से सटा हुआ है। इसका एक गेट पुलिस लाइन को जोड़ता है और दूसरा एसपी के बंगले के सामने वाली सैन्य क्षेत्र की सड़क पर खुलता है। पुलिस लाइन होने के कारण पुलिस की गश्त भी कम ही होती है। ऐसे में शराब पार्टी के लिए लोगों ने उपयुक्त स्थान चुन रखा है। लोग स्कूल की छत पर भी बैठकर शराब पीते हैं।

कहीं पुलिसवाले तो नहीं करते!

स्कूल स्टाफ का कहना है कि उन्हें नहीं पता, यहां कौन लोग आए दिन शराब पार्टी करते हैं। उन्हें तो हर रोज स्कूल आने पर खाली बोतलें दिखाई देती हैं। यहीं पर स्टाफ के कुछ लोगों ने दबी जुबान में कहा कि स्कूल के पास पुलिस लाइन है, एक तरफ एसपी का बंगला और दूसरी तरफ आर्मी एरिया। और किसी के आने की हिम्मत नहीं हो सकती। हो सकता है कुछ पुलिस वाले ही खुद या किसी के साथ मिलकर यहां ये काम करते हों।

HR Police: गृह राज्यमंत्री की कार ओवरटेक की, तो हरियाणा पुलिस ने की क्रिकेटर अतुल वासन की पिटाई

पूर्व टेस्ट क्रिकेटर और आज कल टीवी के किक्रेटर एंकर अतुल वासन को हरियाणा के गृह राज्यमंत्री गोपाल कांडा के काफिले को ओवरटेक करने पर सुरक्षाकर्मियों ने पीट दिया। गुड़गांव टोल ब्रिज से पहले उनकी कार रुकवा कर स्कॉट में तैनात पांच पुलिस कर्मियों ने उनकी पिटाई कर दी। अतुल का महिपालपुर में कार्यालय है।

वासन ने वसंतकुंज दक्षिण थाने में पांचों पुलिस कर्मियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। अतुल बुधवार देर रात करीब डेढ़ बजे वह अपनी कार से वसंतकुंज-गुड़गांव रोड होते हुए गुड़गांव स्थित अपने घर जा रहे थे। तभी प्रदेश के मंत्री गृह वह अपने चालक के साथ टोल प्लाजा से गुजर रहे थे। राज्यमंत्री गोपाल कांडा का काफिला निकला। काफिले में कार में बैठे सुरक्षा गार्डों ने हूटर बजाई।


लेकिन अतुल और उनके चालक इसे नहीं सुन सके। कुछ दूर आगे जाने पर हरियाणा का इलाका लगते ही स्कॉट पुलिस ने भी ओवरटेक कर अतुल की कार को रुकवा लिया और बाहर खींचकर उनकी पिटाई शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने 100 पर फोन किया। दिल्ली की पीसीआर पहुंची। उसने बयान लेने के बाद बसंतकुंज थाने में बुलाया।

उन्होंने वसंतकुंज दक्षिण थाना पहुंच शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस हरकत में आई। दक्षिण जिले की डीसीपी छाया शर्मा के मुताबिक अतुल वासन का सफदरजंग अस्पताल में मेडिकल करवाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें अधिक चोट नहीं आई है। देर रात पुलिस ने जब मौके का मुआयना किया तो पता चला वह इलाका गुड़गांव के डीएलएफ फेज दो थाने में लगता है। लिहाजा वसंतकुंज दक्षिण थाने से अतुल की शिकायत व मेडिकल रिपोर्टडीएलएफ फेज दो थाने को भेज दी गई।

Delhi Police : रईसजादों की लड़की किडनेप की कोशिश, दो गिरफ्तार

देश की राजधानी दिल्ली में दो अलग अलग जगहों पर लड़कियों को अगवा करने की कोशिश की गई। द्वारका में 10 साल की छात्रा का अपहरण करने की कोशिश की गई। लेकिन, लोगों ने अपहरणकर्ताओं को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। वहीं, घिटोरनी इलाके में पांच रईसजादों ने चार लड़कियों को मौजमस्ती के लिए अगवा करने की कोशिश की। पुलिस ने पांच में से दो को गिरफ्तार कर लिया। तीन की तलाश की जा रही है। पुलिस ने इनके कब्जे से लड़की को भी छुड़ा लिया।


गौरतलब है कि द्वारका में डीपीएस स्कूल के सामने अपहरणकर्ता 10 साल की छात्रा को मारुति वैन में अपहरणकर ले जाने लगे। तभी आसपास मौजूद महिलाओं ने शोर मचाया। इसके बाद महिलाओं की शोर सुनकर लोग जमा हो गए। वैन में सवार अपहरणकर्ताओं को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।

जबकि, घिटोरनी इलाके में मॉल से निकल कर कैब में बैठ रही चार लड़कियों को बीती रात एक स्कॉर्पियो में सवार पांच रईसजादों ने अगवा करने की कोशिश की। इन पांच लड़कों ने चारों लड़कियों को जबरन स्कॉर्पियो गाड़ी में खींचने की कोशिश की। हाथापाई और लड़कियों द्वारा शोर मचाने पर रईसजादे एक लड़की को अपने साथ ले जाने में कामयाब रहे।

Delhi Police: रिश्वत लेने पर महिला पुलिस इंस्पेक्टर को दो साल की कैद

दिल्ली यातायात पुलिस की एक महिला इंस्पेक्टर को 500 रुपये की रिश्वत मागने के आरोप में दो साल कैद की सजा सुनाई गई है।

विशेष न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी आर केडिया ने दुराचार के आरोप में 10 साल के लिए निलंबित की गई इंस्पेक्टर अलका सिंह [56] को रिश्वत लेने का दोषी ठहराया। अलका पर 14,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

अदालत ने हालाकि अलका की कैद को 19 अगस्त तक के लिए निलंबित कर दिया है। इस दौरान वह सजा के खिलाफ अपील दायर कर सकेगी।


अभियोजन पक्ष ने कहा कि अलका ने शिकायतकर्ता धमर्ेंद्र शर्मा से 500 रुपये की रिश्वत मागी, जबकि शर्मा के पास अपनी बस से जुड़े सभी दस्तावेज मौजूद थे।

अतिरिक्त लोक अभियोजक विनोद शर्मा ने अदालत को बताया कि शर्मा ने न्यायाधीश से अपनी बस के रिहाई के आदेश हासिल कर लिए थे, लेकिन इसके बाद भी अलका ने उससे 500 रुपये की माग की। इसके अगले ही दिन शर्मा ने इस संबंध में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में शिकायत दर्ज करा दी।

Delhi Police: बदमाशों ने दंपति को पीटा, पुलिस की वर्दी फाड़ी

फर्राटा भरते बाइकर्स अब अपनी गुंडई पर भी उतर रहे हैं। शुक्रवार को ऐसा ही एक वाक्या सामने आया। बाइक सवार दो युवकों ने पहले गलत दिशा से गाड़ी चलाकर एक दंपति की स्कूटी में टक्कर मार दी। जब दंपति ने इस पर ऐतराज जताया, तो वे झगड़े पर उतर आए। यहीं नहीं उन्होंने फोनकर मौके पर अपने साथियों को बुला लिया और साथियों के साथ मिलकर बीच सड़क महिला के पति की जमकर पिटाई की। हद तो तब हो गई।

जब वहां पहुंची पुलिस से भी बदमाशों ने हाथापाई की। एक हवलदार की वर्दी फाड़ डाली। इसकी सूचना मिलने पर थाने से और पुलिस पहुंच गई और बलपूर्वक छह बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। जबकि दो बदमाश फरार हो गए।

भगतसिंह कालोनी की यासिका दिल्ली की आईटीसी कम्पनी प्रगति मैदान में बतौर एजेंट काम करती हैं। जबकि इनके पति रणजीत आहूजा पांच नंबर में ही मशीन वेल्डिंग का काम करते हैं। यासिका शुक्रवार को अपने पति के साथ एक्टिवा से 1 नम्बर मार्केट कपड़े खरीदने जा रही थी।


इसी बीच टाउन न0-1 स्थित ग्रोवर नर्सिग होम के सामने मोटरसाइकिल सवार अलीगढ़ यूपी के राहुल और ओल्ड फरीदबाद के प्रकाश ने गलत दिशा से आकर उनकी स्कूटी में टक्कर मार दी। टक्कर लगने पर रणजीत ने उन्हें ठीक से चलने की हिदायत दी। इस पर वे रणजीत के साथ उलझ गए। नौबत हाथापाई की आ गई। इसी बीच राहुल ने फोनकर अपने साथियों को बुला लिया।

थोड़ी ही देर में राहुल का दोस्त प्रिंस अपने साथी यतेन्द्र, पवन, गौरव, सिकन्दर, रामछेत स्विफ्ट कार से पहुंच गए। वे वहां पहुंचते ही रणजीत पर टूट पड़े। उसका हेलमेट छीन उसके सिर में दे मारा। जिससे उसका सिर फट गया। किसी ने इसकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी। इस पर वहां कोतवाली में तैनात हवलदार दीपक पीसीआर लेकर पहुंच गया।

उसने युवकों को मारपीट करने से रोकने का प्रयास किया। लेकिन वे मानें तो नहीं, उल्टे हवलदार पर टूट पड़े। उसके साथ मारपीट की और उसकी वर्दी फाड़ डाली। इस पर उसने इसकी सूचना कोतवाली थाना प्रभारी उदयराज को दे दी।

थोड़ी ही देर में उदयराज दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस को देख बदमाश भागने लगे। लेकिन पुलिस ने घेरेबंदीकर मौके से प्रिंस, यतेन्द्र, राहुल, पवन शर्मा, गौरव शर्मा व शिकन्दर को गिरफ्तार कर लिया। जबकि प्रकाश व रामछेत मौके से फरार हो गए। जिनकी तालाश की जा रही है। यासिका की तहरीर पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 279,336,323,506,332,353,186,147 व 149 के तहत मुकदमा दर्जकर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी उदय ने बताया कि सभी नेहरु ग्राउंड स्थित एक वर्कशॉप में काम करते हैं।

CG Police : एसपीओ को नियमित पुलिस में शामिल होने की राह साफ

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में एसपीओ को नियमित पुलिस में शामिल होने की राह साफ कर दिया है.

सरकार ने शुक्रवार को पुलिस की नियुक्तियों में स्थानीय युवकों की योग्यता में विशेष छूट देने का फैसला किया.

सर्वोच्च न्यायालय ने गत पांच जुलाई के अपने एक आदेश में राज्य सरकार को नक्सलियों से लड़ने वाले विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) से हथियार वापस लेने के लिए कहा था.

न्यायालय ने कहा था कि एसपीओ सामूहिक रूप से मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं और उन्हें हथियार देना असंवैधानिक है.न्यायालय के इस फैसले के बाद राज्य सरकार ने एसपीओ से हथियार वापस ले लिए थे.

वहीं, हथियार वापस लिए जाने पर एसपीओ ने आशंका जताई थी कि वे नक्सलियों का निशाना बन सकते हैं लेकिन अब कांस्टेबल के रूप में अपनी नियुक्ति के सिलसिले में सरकार के इस फैसले से वे काफी उत्साहित हैं.

राजधानी रायपुर से करीब 450 किलोमीटर बीजापुर के कोतवाली पुलिस स्टेशन में वर्ष 2006 की शुरुआत से एसपीओ के रूप में तैनात महेंद्र साकनी ने कहा, ईश्वर को बहुत-बहुत धन्यवाद, मेरे हथियार मुझे वापस मिल जाएंगे. हमें वापस सेवा में शामिल करने के सरकार के इस फैसले मैं बहुत खुश हूं.

ज्ञात हो कि सर्वोच्च न्यायालय ने नक्सलियों के खिलाफ जनजातीय लोगों को हथियार देकर उनकी नियुक्ति एसपीओ के रूप में करने पर राज्य सरकार की जमकर खिंचाई की थी और सरकार से कहा था कि इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए.

कोतवाली पुलिस स्टेशन पर एसपीओ के रूप में तैनात चेतन दुरगम (32) ने कहा, इससे बस्तर क्षेत्र के युवाओं के बीच यह संदेश जाएगा कि सरकार नक्सलियों से निपटने के प्रति गम्भीर है.

एसपीओ को नियमित पुलिस में शामिल करने का फैसला मुख्यमंत्री रमन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की एक बैठक में लिया गया.

बैठक में निर्णय लिया गया कि बस्तर इलाके में होने वाली कांस्टेबलों की भर्ती में स्थानीय लोगों की शैक्षणिक एवं शारीरिक योग्यता और उम्र में छूट दी जाएगी.

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने करीब 5000 जनजातीय युवाओं की नियुक्ति एसपीओ के रूप में की है.

Delhi Police: पंजाबी गायक सुखविंदर मान कबूतरबाजी में गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने मशहूर पंजाबी गायक सुखविंदर मान उर्फ सुक्खा को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि वह अपनी पत्नी के नाम पर किसी अन्य महिला को विदेश भेजने की कोशिश कर रहे थे। यह गिरफ्तारी अमेरिकी दूतावास की शिकायत पर की गई है।

पुलिस के मुताबिक होशियारपुर की रहने वाली एक महिला अनिता ने २००८ में अमेरिकी दूतावास में वीजा के लिए अर्जी दी थी। वीजा में इस महिला ने अपना नाम बदलकर कमलजीत कौर और पति का नाम सुखविंदर मान दर्शाया था। लेकिन दूतावास की ओर से महिला अर्जी को खारिज कर दिया था। इसके बाद महिला ने दूतावास में एक बार फिर वीजा देने की अर्जी दे दी। इस बार दूतावास की ओर से इस फर्जीवाड़े की शिकायत चाणक्यपुरी पुलिस से की गई।


पुलिस ने दूतावास की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए महिला अनिता को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद इस महिला ने पुलिस को बताया कि पंजाबी पॉप गायक सुखविंदर मान ने उससे विदेश भेजने के नाम पर दो लाख रुपए लिए थे। इसके बाद उसने उसकी पत्नी कमलजीत कौर के नाम से वीजा के लिए अर्जी दी थी। इसके बाद पुलिस ने सुखविंदर को गिरफ्तार कर लिया। बताया जाता है कि सुखविंदर लंबे समय से उस्मानपुर इलाके में रह रहा है। पुलिस ने उसे जनकपुरी डिस्ट्रिक सेंटर के पास से एक गुप्त सूचना के बाद पकड़ा है। पुलिस यह जानने की कोशिश में लगी है कि वह अबतक और कितने लोगों को इस तरह से विदेश भेज चुका है।

Monday, July 18, 2011

Gujrat Police: Case agaianst gujrat police in encounter case

Ahmedabad, Jul 17 (PTI) The Central Bureau of Investigation (CBI) has registered a case relating to alleged fake encounter of Sadiq Jamal Mehtar in 2003 by Gujarat police, an official statement on the agency' website said.The case was registered by the Central agency yesterday on the directions of the Gujarat High Court."The CBI has registered a case relating to the killing of Sadiq Jamal Mehtar in an alleged police encounter by the Gujarat Police, on the directions of High Court of Gujarat in Special Criminal Application no.963/2007, filed by the brother of deceased," the CBI statement said."A Special Investigation Team (SIT) has been constituted by CBI under a Joint Director and investigation is continuing," the statement added.The case has been registered against police officials of Gujarat and Maharashtra and others.


On June 16, High Court judge Justice M R Shah had ordered CBI investigation into the Sadiq Jamal encounter with which certain high ranking police officers were associated, including suspended IPS officer D G Vanzara, one of the key accused in Sohrabuddin Sheikh fake encounter case.Sadiq was killed in a police encounter by city crime branch officials near Galaxy cinema in Naroda area of the city on January 13, 2003. .

police policy: Strengthen local police station to pack a punch against terror

Terrorists have struck in Mumbai once again. This was the fifth major strike against India's biggest commercial hub, the earlier ones coming in 1993 (257 killed), 2003 (52 killed), 2006 (188 killed) and 2008 (166 killed). Securing Mumbai, with its demographic complexities, cannot be easy, but it should not be that difficult either. After all, New York, Madrid and London were also attacked by terrorists, but those cities were able to secure themselves and the terrorists could not make any subsequent dent.


It is true that in the wake of 26/11, the government took a number of steps to strengthen law enforcement and build its counter-terrorism edifice. National Security Guard (NSG) hubs were established at locations other than Delhi. The National Investigation Agency was set up. Counter-insurgency and anti-terrorism schools were established. The police strength was augmented and its equipment upgraded. A multi-agency centre was activated. Coastal security was beefed up. These measures went a long way, but were obviously not enough.

Assam Police : Rape charges against police officer

A police officer in Assam's Dibrugarh district was arrested Monday on charges of raping a woman in Rohmoria area. According to the FIR filed by the victim in the Rohmoria police station, it was alleged that the officer in charge sub-inspector Pabitra Pran Barua had gone to her
house Sunday to ask for chillies.On finding her alone, the sub-inspector raped her, the FIR said.


Based on the FIR, the SI was suspended and taken into custody, superintendent of police Arabinda Kalita said.

Barua was being questioned and the woman was sent for medical examination, Kalita said.

police policy: Urgent police reforms need of hour, say experts

The latest terror bombings that ripped through India’s financial and entertainment capital have shifted the focus back on the much-awaited police reforms and the absence of preventive intelligence gathering in India.

Reforms would mean doing away with the colonial legacy in the form of the archaic Police Act of 1861, if the nation is to be saved from terrorist outfits and homegrown subversive elements, say experts working on bringing about these changes. The blasts have again exposed known flaws in India’s internal security structure allowing a silent growth of homegrown terrorists, experts say.


The main problems India faces are the vacancies in police forces and inadequate training of force personnel. These problems are only aggravated by the poor intelligence gathering model.

According to official figures, India’s police-population ratio is just 120 per 100,000 people. Globally the ratio is an average of 270.

India has over 20 big and small central intelligence and security agencies – including the Intelligence Bureau (IB), the Central Bureau of Investigation (CBI) and the National Investigation Agency (NIA) – apart from state police intelligence wings.

India’s capacity to repel a terror attack may have improved but the country still lacks the ability to pre-empt such strikes, experts say. Ground-level intelligence gathering is too poor to prevent modern threats.

When Ajai Sahni, a known security expert, was asked if he thought there are chinks in India’s security establishment, he quipped: ‘There are gaps, enormous gaps.

‘Can you believe that India’s main internal spy agency, the IB, has less than 5,000 field agents to gather ground information from a population of 1.2 billion?’ Sahni told IANS.

‘And their primary job is to do political intelligence for the ruling parties.’

Police officer-turned-activist Kiran Bedi has a question for the government, particularly the union home ministry that looks after internal security management.


‘How much did the Indian police forces reinvent themselves after the (2008) terror attack in Mumbai? You are managing a crisis by creating these intelligence agencies, not preventing a crisis. How will you prevent terrorism in the absence of a trained policeman who is your eyes and ears on the ground?’

Bedi told IANS that if normal policing ‘is absent and you don’t have people on the ground to collect information, these things can happen’.

Sahni, who runs the Institute for Conflict Management that focuses on internal security research in India, said if ground-level intelligence gathering was there, then of course ‘we wouldn’t have taken so long to know who did the Mumbai blasts again’.

‘Haven’t we identified the subversive elements that need constant surveillance? If so, how do we allow them to grow and strike again?’

He recalled an old intelligence gathering system in the country of having a watchman in every village. Those village watchmen used to report to intelligence officers at the local police station every day with whatever information they had.

‘This system has been done away with. But we need a system like this. Not the redundant meta-institutions like the NIA, which are wasteful energy hubs. Nothing prevents terrorism than local intelligence gathering.

‘You can have a whole web of technology to aid these agencies. You can have a grid or a data centre linking 21 databases. You can have National Counter Terrorism Centre. But if the input doesn’t come from the ground, what will you feed them with and what will you work on?’

Former director general of Border Security Force (BSF) E.N. Rammohan feels that politicisation of the intelligence agencies have diverted them their prime duties.

‘The intelligence agencies need to be de-politicised to make them professional and ready them to take up the challenge against terrorists,’ he added.

P.K. Hormis Tharakan, former chief of the Research and Analysis Wing (RAW), said a ‘coordinated effort’ in intelligence gathering was needed to tackle the terrorist threats.

But he said it was incorrect to say the post-26/11 efforts were non- productive.


The long interval of 17 months between the last major terror strike and the 13/7 blasts may be because of these anti-terrorism measures, he said.

Since 1979, governments have set up a number of commissions to reform the police but their recommendations have been largely ignored because politicians, especially in the states, dont want them as they want to keep the police under their thumb.

In October 2005, the union home ministry constituted the Police Act Drafting Committee (PADC) – commonly known as the Soli Sorabjee Committee – which submitted a model police act a year later.

The Supreme Court on Sep 22, 2006, acting on the former police officers’ petition, asked the central government to kickstart reforms which included separating the investigation and law and order functions of the police and have a system of preventive intelligence gathering system in place.

But all that is still awaited.

Delhi Police : Delhi Traffic Police will soon have its own engineering wing,

The Delhi Traffic Police will soon have its own engineering wing, which will be responsible for the design and placement of traffic signals and other crucial road signs.

The decision was taken during a meeting of the DDA’s planning wing, Unified Traffic and Transportation Infrastructure Centre (UTTIPEC), following which, instructions to set up this wing was given by L-G Tejendra Khanna.


“While the traffic police decides on the placement of signals, it is the PWD which marks zebra crossings, puts up signage and other road infrastructure. Till now, this was not in tandem with the signals. For years, pedestrians had to suffer due to this,” said Ashok Bhattacharjee, director of UTTIPEC.

The traffic police had recently readjusted the timing of 37 signal locations, keeping pedestrian’s comfort in mind. But, even at these locations there was a lack of essential road markings such as zebra crossing, stop lines and proper road signage.

Punjab Police : Punjab police personnel to train in the US

CHANDIGARH: As part of police reforms in Punjab, a team of state police may soon go to New York for training with their counterparts in the US, a senior official said on Sunday.

Punjab government will soon sign an MoU to this effect with John Jay College of Criminal Justice , City University of New York , Principal Secretary Home D S Bains, said today.

The proposal for the two-way interaction between the police forces of New York state and Punjab was put forward by a visiting team the American college.


Under the plan, a team of high-ranking police officers from Punjab would get one-week training in New York and a team of five officers with expertise in different areas would visit Punjab in the first phase.

"The main aim of this joint venture would be to motivate our police force to perform better," said Bains.

Maria Haberfeld, who led the US team, said that during her visit to Police Training Colleges Phillaur and Jahan Khelan training institution, she was impressed with the quality of training being imparted but the facilities could be improved.

She suggested that new topics like manpower management, resource management, leadership development, and better deployment of the force could be introduced in the police training syllabus to enhance the skill and performance of the police force.

maharastra police:Nagpur police : Police vehicles for household chores?

NAGPUR: If a few of senior officers have taken away the sophisticated vehicles meant for QRT, there are also allegations of misuse of official cars and jeeps too. The 'another group' alleges that these officers allow their families and friends to use the vehicles at the expense of the department.

A source from the police department said that several officers engage their official vehicles to send their children to school and bring them back home.


"In this admission season most of the officers are not only engaging official vehicles but also manpower to collect college forms, prospectus and finding out the seat availabilities across different institutions," said the source.

A senior officer said that several police station in-charges would not allow their second inspectors to use the official jeep but use it for their family members. "Some of the officers even allow their family members to use the official vehicle and constables for buying vegetables and purchase groceries," said the source.

channai Police: Police seek help from fire dept for Marina beach patrol

HENNAI: City police have sought the help of the fire and rescue services department to provide a stand-by rescue team at Marina Beach to save people from drowning.

"We have a tie-up with Coast Guard security personnel but that is not sufficient. It takes them at least 20 minutes to reach the beach after they get the information. If a rescue team from the fire and rescue services is ready, they can be roped in immediately," a police officer said.

The request has been sent to the fire services director through the city police commissioner JK Tripathy. "We are hoping to get a positive reply soon. The rescue team will be stationed at Anna Square police station or Marina police station. The team will have a rubber boat and a motor-fitted boat. They can go into the sea and search for victims," the officer added.


Drowning cases off the Marina are a problem that the city police are battling. "Despite all our precautions and rescue teams, two people drowned in June and July. Police personnel with the help of fishermen and volunteers rescued two people who were washed away near Anna Square four days ago," said Triplicane assistant commissioner of police S Senthilkumaran. Anna Square police station is in charge of the coastline of 1.5km from the Cooum River estuary to Kannagi Statue. "We have deployed 15 policemen to patrol the beach. Many tourists and people from other states don't understand our language but they do listen to us eventually. College students are the ones who flout rules," said Anna Square police inspector Mohammad Nasar.

"We have two permanent volunteers at the police station who help us with rescue operations. Some fishermen also come to the aid of the police. We have prevented more than 100 tourists and youngsters from venturing into the sea," the inspector added.

Mumbai Police : Very soon nothing will remain french for Mumbai Police

With more foriegners being arrested for various crimes, the Mumbai Police has decided to approach the Home department with a proposal for a Special Linguist Cell. Till now, the Special Branch used to coordinate with embassies concerned for translators as and when required. “There is a need for translators now, but we are still working on the modalities,” said Deven Bharti, Additional Commissioner of Police (Crime).


“Police officers from across divisions have sought our help in the past. Often students from our campus have helped with the translation,” says Dr Satishkumar S. Pandey, senior Professor and Linguist at Mumbai University. “When the Crime Branch officials met me about setting up a dedicated cell, I directed them to approach the university formally. The communication is taking shape and our attempt is to ensure an official channel to coordinate whenever there is a need for translators,” added Pandey.

Bangalore Police : Your friendly neighbourhood cop will now take complaints at your door

To aid those who hesitate to approach the police with a complaint, Bangalore police has decided to arrive at the doorstep.

A new beat system was launched in north-east division on Sunday, as a first step to making the police more approachable.Constables will be on beat duty on day and night shifts, and the new system hopes to incorporate the support of citizens too to help prevent crime.

The beat system, which had gone out of favour for a decade, is now being revived. Policemen from respective jurisdictional police stations will be made in-charge of streets.

“The policeman on duty will be responsible for maintaining law and order in his area. The police will have a network, and all the people in the area will be part of the system to better maintain law and order,” said city police commissioner BG Jyothi Prakash Mirji, adding that the new system would increase the responsibility of the police.


Members of the public in each locality would be expected to get in touch with the beat constable about any suspicious activity.
“When crime in each street is controlled, then the whole city will be peaceful,” said Mirji. He said that the residents would be involved in the vigilance maintained by the police.

Members of the public suggested that the night beat constable be armed with a rifle, as there were cases when the culprits assaulted policemen.

Police also hope that the beat constable would be able to resolve family disputes.

The city police commissionerasserted that members of the public should inform higher authorities if they face harassment at the hands of policemen or if they find the cops unwilling toregister complaints.

“My phone will be switched on 24 hours. We will take necessary steps to ensure that incidents of harassment do not get repeated. But the public should also treat policemen as human beings,” said Mirji.

channai Police: City & suburban police offices in for merger

CHENNAI: The government has decided to merge the city and suburban police commissionerates into one unit headed by one commissioner but functioning as two geographical zones under additional commissioners.

Accepting a proposal from the police department, chief minister J Jayalalithaa, who is also the home minister, is likely to announce the merger either at the Independence Day parade on August 15 or during the state assembly's budget session that starts August 4.


The merger has been proposed to improve coordination and communication between the police in city and the rapidly growing suburbs. But the decision may mean that suburbanites may have to travel to the Egmore commissioner office to lodge complaints while earlier they had one in St Thomas Mount.

The police department had come up with two proposals. Plan A suggested a complete merger of city and suburb. But the united commissionerate will be divided into two zones – with the dividing line running east-west along Chepauk and Poonamallee. Plan B recommended that the St Thomas Mount police district, currently under suburban limits be included in city. The government has reportedly favoured Plan A. "This decision not only revives the Greater Chennai police commissionerate concept but also facilitate better policing, good administration and coordination," a senior police officer told TOI.

Many in the police community have welcomed the proposal. "Peripheral areas are growing very fast. More and more the lifestyle, mindset and traffic flow patterns of the suburbs are becoming similar to the city. I feel that the policing was better under the one-commissioner system until 2008. If the merger happens, crime prevention and detection will improve," former DGP V Vaikunth told TOI. During his service, Vaikunth, in 1995, did a study on the Madras metropolitan policing system. Based on his report, the then AIADMK government had extracted St Thomas Mount, Ambattur and Madhavaram police districts from Chengai East and merged them with city.


The merger proposal has been criticized by a few officers, especially those in the suburb. They say that it would be difficult to police and administer faraway places from the city. Also, residents from the suburbs will have to travel a long distance to come to the commissioner's office and file complaints. "Instead of just the commissioner being of IG rank, every police district must be headed by additional commissioners of IG rank. Two deputy commissioners along with two assistant commissioners should be provided to take care of the district. This means that people can go to the additional commissioner with complaints," Vaikunth told TOI.

Supporting the merger idea, former DGP WI Dawaram said: "Chennai harbour, airport and other major office premises should be come under city police limit," he told TOI.

London Police: Hacking scandal fells Britain’s top policeman

LONDON - A phone-hacking scandal centred on Rupert Murdoch’s News Corp cost Britain’s top policeman his job and renewed questions on Monday about Prime Minister David Cameron’s judgment.

In another major development in a scandal that has shaken Britons’ faith in the police, press and political leaders, detectives arrested Rebekah Brooks, former head of News Corp’s British newspaper arm, on suspicion of intercepting communications and corruption.
The flame-haired Brooks, who once edited the News of the World tabloid, was released on bail at midnight on Sunday, about 12 hours after she went to a London police station to be arrested, her spokesman said. Brooks has denied any wrongdoing.
Analysts said the gathering pace of heads rolling had turned up the heat on Cameron and Murdoch over their handling of the scandal, with the media tycoon due to be questioned by parliament in a possible showdown on Tuesday.


The News of the World, which published its final edition a week ago, is alleged to have hacked up to 4,000 phones including that of murdered 13-year-old Milly Dowler, sparking a furore that forced Murdoch to close the paper and drop a $12 billion plan to buy all of highly profitable broadcaster BSkyB .
Paul Stephenson, London’s police commissioner, quit on Sunday in the face of allegations that police officers had accepted money from the paper and had not done enough to investigate hacking charges that surfaced as far back as 2005.
The trigger for his resignation was revelations he had stayed at a luxury spa at which Neil Wallis, a former News of the World deputy editor, was a public relations adviser. Wallis, also employed by police as a consultant, was arrested last week in connection with the hacking scandal.
“I had no knowledge of the extent of this disgraceful practice (of phone-hacking),” Stephenson said in a televised statement.
Brooks quit on Friday as chief executive of News International, the British unit of Murdoch’s News Corp , but has denied she knew of the alleged widespread nature of the hacking.


The scandal has raised concerns not only about unethical media practices but about the influence Murdoch has wielded over British political leaders and allegations of cosy relationships between some of his journalists and police.
Cameron has come under fire for his friendship with Brooks and for employing former News of the World editor Andy Coulson as his press secretary after Coulson quit the paper in 2007 following the jailing of a reporter for phone-hacking.
Tim Bale, politics professor at the University of Sussex, said: “It has become almost a crisis of governance in the United Kingdom. (Stephenson’s) resignation takes us beyond a few bad apples ... There is a sense of things sliding out of control.
“The actual text of (Stephenson’s) statement pointing to parallels between himself and the prime minister is quite breathtaking. It won’t make Mr Cameron do the same thing, but it reminds people once again of the Coulson problem.”
The opposition Labour Party, which has capitalised on Cameron’s discomfort, seized on Stephenson’s reference to the Coulson appointment in his resignation speech.
“It is striking that Sir Paul Stephenson has taken responsibility and answered questions about the appointment of the deputy editor of the News of the World,” Labour home affairs spokeswoman Yvette Cooper said.
“The prime minister still refuses to recognise his misjudgment and answer questions on the appointment of the editor of the News of the World at the time of the initial phone hacking investigation.”
Cameron took office last May at the head of a Conservative-led coalition that has made cleaning up the public finances its priority.


GLOBAL CONCERN
With politicians from Australia to the United States demanding to know if similar abuses occurred elsewhere in Murdoch’s global media business, the 80-year-old has been forced on the defensive and the position of his son James as heir-apparent has been called into question.
Brooks and Rupert and James Murdoch are due to be questioned by parliament on Tuesday, including over reports that News International misled legislators during earlier hearings.
But Brooks’s spokesman said her arrest might cast doubt on whether she could appear before politicians.
“Anything that will be said at the select committee hearing could have implications for the police inquiry,” said David Wilson, adding Brooks was “shocked” by the arrest.


The Financial Times reported on Monday that Labour legislator Tom Watson had written to the Serious Fraud Office (SFO) asking it to investigate payments he alleged were made by News Corp to cover up the scandal.
A SFO spokesman said he did not know if the letter had been received but that the agency would take such a request “very seriously”.
Brooks became the focus of widespread anger over the phone-hacking scandal but was initially protected by Murdoch, who guided her rise through the male-dominated world of UK tabloid journalism to become editor of the News of the World in 2000 and the Sun’s first female editor in 2003.
But her initial refusal to quit, and a faltering speech she delivered when she closed the News of the World and ended the careers of dozens of colleagues, prompted some journalists to say she was out of touch.
In 2003, Brooks said the News of the World had made payments to police in the past but could not remember any specific examples.
Murdoch, who some media commentators say at first misjudged the strength of public anger, published apologies in several British newspapers at the weekend.
He lost another loyal executive on Friday when Les Hinton, another former head of his UK newspaper business, resigned as chief executive of Murdoch’s Dow Jones & Co which publishes The Wall Street Journal.
Key facts about London police chief Paul Stephenson
• Stephenson was forced to abandon his official duties in January this year after suffering complications following operations to remove a pre-cancerous growth from his leg. He returned to work in April, one month earlier than expected.
• He ordered a review of the News Corp phone-hacking investigation in July 2009 after extensive media coverage. But after just eight hours consideration, the decision was taken by the officer he appointed, John Yates, that there was no new evidence that warranted the inquiry to be reopened.
• Stephenson came under fire on a number of occasions after becoming Metropolitan Police Commissioner. He was forced to apologise for his force’s handling of the riots that broke out in London during the G20 summit in April 2009 in which a newspaper vendor was killed after a clash with an officer.
• Media reported he apologised to the royal family and that he also tendered his resignation after a car belonging to Prince Charles was attacked by rioters during a demonstration against rising student fees in the capital in December last year.
• Stephenson became a police officer in 1975 when he joined Lancashire Police in northern England. Apart from a stint with the Royal Ulster Constabulary in Northern Ireland, he remained in the force until he became Assistant Chief Constable of Merseyside Police in the city of Liverpool in October 1994.
• He returned to Lancashire in May 1999 when he was appointed Deputy Chief Constable before becoming Chief Constable in July 2002. In March 2005, he was appointed Deputy Commissioner of London’s Metropolitan Police Service and took the top job in British policing in January 2009 following the resignation of Commissioner Ian Blair, after he too was forced out after months of media pressure.

Gujrat Police: Police arrest stepson for killing woman ASI

AHMEDABAD: The mystery behind the murder of a woman assistant sub-inspector of police has been solved. Her stepson was arrested by Naroda police on Sunday. Cops said that it was a property dispute that drove Dinesh Rohankar, the stepson, to kill the woman cop Sharda, 52. Dinesh has been booked for conspiracy and murder of Sharda.

According to Naroda police, Sharda was killed with a blunt weapon at her residence at Sun bungalows, near Parshwanath Township in Naroda on Saturday. She was posted at the women police station in Karanj. Dinesh had claimed to have chanced upon her body and he had raised an alarm to draw attention of other family members and neighbours.


"We got suspicious about Dinesh's activities. He claimed that finding the door locked, he had broken the window and spotted Sharda's body. He could have easily gone to the back of the house to check. We also noticed that the killer had mopped up the entire place to clean blood stains from the floor. Also, there was nothing missing from the house which eliminated the possibility of an armed robbery. The final clue was tea and milk near the gas stove which pointed towards the presence of someone known to the victim," said G H Gohil, inspector of Naroda police station.

Mumbai Police : Mumbai blasts: CM may head small team to monitor police

The state government is looking to set up a ‘cohesive structure’ headed by Chief Minister Prithviraj Chavan to improve policing in Maharashtra. Chavan would prefer a cabinet sub-committee or a small group of ministers to direct modernisation of the police force and keep an eye on the
overall security situation, said sources close to the chief minister.

Chavan was likely to speak to Nationalist Congress Party chief Sharad Pawar to work things out between the allies as, under the power-sharing arrangement, the NCP holds the Home portfolio. He may also consult former Chief Ministers.


“Chavan has said security has not been on the agenda in the cabinet meetings since he took over as CM. He also believes it is difficult to discuss security issues, which are generally technical, with a group of as many as 40 ministers,’’ said a senior official in the Chief Minister’s Office.

Chavan had said in interviews last week that home portfolio should not have been given to the NCP, though he had clarified that he had full faith in Home Minister RR Patil.

Chavan had recently admitted to procedural problems in buying equipment and improving facilities for the police. The sources said his view was decisions had to be taken at the political and not administrative level to cut through the red tape.

On Sunday, the chief minister himself told the media: “The state had formed a state security council and a state security commission for taking the security agenda forward after the 26/11 attacks. We have to see how to take that forward or have some kind of alternative, more cohesive structure. Our main worry now is how to prevent another such attack and we are looking at all possible solutions.’’


“We are looking at upgrading communication networks in Mantralaya by buying satellite phones, upgrading wireless systems, and purchasing better radio frequency channels. I will also take a meeting soon to finalise purchase of CCTVs for Mumbai. I think they will be of help in deterring such attacks and in detection. This has been the case in London.’’

He may hold a meeting on Monday on buying 5,000 CCTV cameras for Mumbai. In a bid to attract better talent to intelligence postings, Chavan is also looking at better remuneration for these jobs and making such a stint mandatory for promotions.

Gujrat Police: Police foil bomb plot in Ahmedabad

AHMEDABAD — A plot to disturb this communally sensitive city was foiled when police arrested a man from his house in the old city and recovered at least 10 crude bombs he had hidden near a desolate pond in his neighbourhood.

The police said Shahzad, who had made the explosives using nails, glass pieces, ball bearings, gun powder etc, had planned to use them for explosions during the July 3 annual religious procession, ‘Rathyatra’, in the city.

However, he told the interrogators, he could not carry out his plans because of very tight security with some 15,000 policemen patrolling the city. Shahzad said he was re-inspired by the July 13 Mumbai bomb blasts and wanted to execute his plan during a major Hindu festival, ‘Janmashtmi’, next month.

The police also recovered two country-made pistols and live cartridges from his home. Surprisingly, the police were tipped off about Shahzad’s bomb-making expertise by his wife who was angry after a tiff with him on Saturday night.

In a fit of rage, she told the control room in the wee hours of Sunday that her husband had threatened to destroy their home with a bomb. The cops raided his home within minutes and arrested Shahzad after they found a crude bomb in the dingy house. Soon, he led the police to a nearby pond where he had hidden 10 more bombs.

A series of 24 synchronised bombings ripped Ahmedabad on July 26, 2008, killing 56 people and injuring 240 people. Again, around 24 dud bombs were recovered in Surat the next day. The court has till now framed charges against 64 accused while 34 others are still absconding. The trial in the case is to begin soon.

maharastra police:Nagpur railway police cracks CM wife's purse theft case

MUMBAI/ NAGPUR: The stolen handbag of Satvasheela Chavan, wife of chief minister Prithviraj Chavan, was retrieved by the government railway police (GRP) with the arrest of one person. Satvasheela was travelling in the Maharashtra Express when her handbag containing Rs 40,000 in cash, a cellphone and a debit card was stolen near Manmad on July 9. GRP officials have also detained one more person in the case and are probing his role.

Satvasheela's stolen handset provided important leads to the police. "We used latest electronic surveillance including cell site location tracing. All calls made from the handset in the period were scanned. Cellphone tracking was also done," superintendent of police (Nagpur railway) Yashasvi Yadav told TOI. "The IMEI technology was also used simultaneously to trace the stolen handset," he said.

Yadav, a tech-savvy officer and recipient of international award,

said that local crime branch team under him was put on the job after the sensational theft came to the fore.

The phone had been switched off and Satvasheela's Sim card had been replaced with a new one. "We are questioning the person in whose name the new Sim card was registered. He has been detained and we are probing the extent of his involvement," an official said. Most of the stolen valuables have been recovered.

GRP officials added that the prime accused appears to be a hardened criminal. "Items stolen from other passengers like laptops, cellphones and other valuables were also recovered. Unsolved past cases will be detected with this arrest," the official said.

"Offences on the railways are usually difficult to detect as long distances are involved and criminals don't have a fixed residence. The case was a big challenge to us," said Yadav, whose LCB team solved the theft in less than a week.

Satvasheela had boarded the Kolhapur-Gondia Maharashtra Express from Karad to visit a medical college in Jalgaon. She was travelling in one of the air-conditioned two-tier coaches. Two police guards were accompanying her. Nobody realised that her handbag was stolen till the train reached Manmad in Nashik district. Sources said when the cops dialled Satvasheela's stolen phone, someone answered the call but later switched it off.

The LCB team is likely to reach Nagpur in Geetanjali Express with the accused. It was the first major detection by railway police after IIT alumni Yadav took over the reigns of the Nagpur railway police recently and revived the dormant LCB unit injecting fresh lease of life into it.

Mumbai Police : Mumbai blasts: Faiz's neighbourhood upset after questioning, death

In protest of the death of Faiz Usmani, who died following his interrogation by the Maharashtra ATS in connection with the July 13 serial blasts, residents shut all the shops and establishments in the Shivaji Nagar-Govandi area yesterday.

The situation took a turn for the worse as Faiz's family members alleged that he died because he was tortured in police custody.

For their part, the police, fearing a backlash in the Muslim-dominated locality on the occasion of Shab-e-Baraat yesterday, deployed extra forces in the suburb.

Speaking to media persons outside Shivaji Nagar police station yesterday, Joint Commissioner of Police (Law and Order) Rajnish Seth said, "We have deployed extra police in this area because it is minority-dominated.

We fear that something serious may happen, keeping in mind the festival of Shab-e-Barat. I have come here to keep tabs on the situation."

Faiz, the brother of 2008 Gujarat blast suspect Afzal Usmani currently behind bars, lives in the same neighbourhood as that of Mohammad Ali and Dr Salman Farsi accused in the 2006 Malegaon blasts case. He died at 1.30 am on Sunday at Sion hospital, following interrogation by cops.

'Pressurised'
Faiz was picked up by the Chembur unit of the Crime Branch for questioning in the afternoon and was admitted to Sion hospital in the evening after he allegedly fell sick.

Faiz's son Azeem said, "My father was picked up for interrogation by cops and was pressurised, even though he wasn't involved in any criminal activity. They are to blame for this."

He added, "He was at his teashop in Govandi at 3 pm on Saturday, when a Crime Branch official arrived and picked him up.

An hour later, a police official informed us over the phone that due to a chest problem, my father had to be admitted to Sion hospital. When we reached the hospital, my father was in the ICU. Then he was shifted to the general ward, and later to the ventilator, before he was declared dead."

However, spokesperson of the Mumbai Police, DCP Nisar Tamboli, rubbished the allegations. He said that a CID team, currently in Pune, would conduct an inquiry into Faiz's death. "Allegations by his family members are baseless," he said.

His body was sent to JJ Hospital for postmortem to ascertain the exact cause of death. Faiz is survived by his wife, a daughter, and five sons. His relatives and neighbours said that he was already suffering from hypertension and had not taken his medicines for the last three-four days.

Samajwadi Party leader Abu Azmi, MLA of the locality, who visited the hospital, said, "I will meet the home minister and the chief minister. We all want that the July 13 blasts culprits to be arrested and hanged. But the police cannot harass a common man to such an extent that he bursts a vein because of all the tension."

Doctors say
According to sources in Sion hospital, Faiz died due to brain haemorrhage, usually seen when a person is exposed to some kind of a shock.

"Usmani died at 1.30 am while he was under treatment for hemi-paresis and hypertension in the Lokmanya Tilak Hospital," doctors said. A preliminary investigation showed no bodily injuries, they added.

Dr Sandhya Kamat, the hospital's dean, said, "He was brought to the hospital at around 5:30-6:00 pm on Saturday evening.

In the CT scans, our doctors observed massive bleeding in his brain region. However, only post mortem reports will be able to ascertain the cause of death."

Autopsy report
The report of Faiz Usmani's postmortem, conducted by a team of forensic doctors at JJ hospital, reveals that there were no physical injuries to the body.

However, there was an intra-cerebral haemorrhage in the brain region, owing to the rupture of the cerebral artery. The doctors have preserved the brain matter for neuro-hystopathology.

Mumbai Police : Mumbai blasts: What killed Faiz Usmani? Police torture or BP

Did Faiz Usmani, brother of Indian Mujahideen operative Afzal, die of police torture? While his family blamed the police for his custodial death, the crime branch cited hospital reports and said Usmani died of hypertension.

The police had picked up Usmani on Saturday afternoon in connection with the Wednesday’s blasts. The police felt he might reveal something as he was in regular touch with his brother, a crime branch officer said. His brother Afzal is an accused in the 2008 Ahmedabad blasts.

The police said he was suffering from hypertension at the time of death but hospital doctors said the exact cause of death would be known only after the post-mortem. But Usmani’s family members strongly denied that he was suffering from any disease.

They alleged that the police had tortured him, which led to his death.

Dr Bashar, a neighbour of Usmani, said the police had grabbed him by the neck when they took him on Saturday. “Their torture must have cost him his life,” he said.

Usmani was questioned for about 20 minutes when he complained to giddiness, an officer said. He was taken to Shatabdi Hospital and then to Sion hospital when his condition did not improve. He died around 1am, he said.

Several doctors, however, find it hard to believe that a 35-year-old would die of hypertension. Some say it would be the rarest of rare case of natural death if he did die of the disease.

The police termed the family’s allegations false. “The doctors have said his body had no injury marks,” Nisar Tamboli, DCP (detection), said. “He had hypertension and was on medication.

Since he did not take his medicines for the past two-three days, he might have suffered a stroke.” The officer said that the state CID would look into the matter and “its investigation would bring the real picture out”.

On Sunday evening, the agency questioned the crime branch’s Chembur unit officers, who had gone to Usmani’s home in Govandi, for almost two hours.